शाहजहांपुर के हरदोई रोड पर हादसे के बाद जाम लगाने के दौरान प्रभारी निरीक्षक नोकझोंक करते मृतक छा?
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शाहजहांपुर। सरकार योजना तो बहुत बनाती है। लेकिन उसे अमली जामा नहीं पहनाया जाता है। गांव गुवारी के आसपास यदि कोई खेल का मैदान होता तो शीबू की जान न जाती।
सरकार की मिनी स्टेडियम की योजना की हकीकत सामने आई। विकासखंड भावलखेड़ा में कोई भी खेल मैदान है। रोजा में रेलवे का स्टेडियम है, जो यहां से करीब 6-7 किलोमीटर है। युवाओं को दौड़ लगाने, टहलने और व्यायाम आदि के लिए हाईवे पर आना पड़ता है।
हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। शीबू भी अपने दोस्तों के साथ हाईवे पर रनिंग के लिए आया था। वह अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहता था। इसलिए सुबह जल्दी उठकर प्रतिदिन रनिंग करता था। शीबू के दोस्त शिवम कनौजिया के मुताबिक शीबू प्रतिदिन उनके साथ रनिंग के लिए जाता था। बेहद दुखद है। वह हादसे का शिकार हो गया। हरदोई रोड पर दौड़ लगाने के लिए निकले कक्षा नौ के छात्र शीबू को टक्कर मारकर भागने वाले वाहन का पता लगाने के लिए परिजनों ने जब रोजा थर्मल पावर केे कर्मियों और पुलिस से मिन्नतें कीं तो निराशा ही हाथ लगी। रोजा के एक कार शोरूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे से कार की पहचान हो सकी।
हादसे के बाद आक्रोशित परिजनों ने बीच रोड पर शव रखकर जाम लगा दिया गया। हालांकि जाम देखकर बैकफुट पर आई पुलिस ने दोबारा रोजा थर्मल पावर में जाकर सीसीटीवी फुटेज देेखे, लेकिन उनमें भी तस्वीर साफ नहीं आई। बाद में सीओ सिटी सरवरण टी. ने स्वयं आकर रोजा थर्मल पावर के भीतर सीसीटीवी फुटेज चेक किए। इसके बाद उनके निर्देश पर पुलिस ने सीतापुर मार्ग और बरेली मार्ग पर लगे सीसीटीवी को चेक किया। रोजा में एक कार शोरूम पर लगे कैमरों में अर्टिगा कार जो कि क्षतिग्रस्त अवस्था में थी, दिखाई दी।
उसका नंबर भी स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा था। पुलिस ने जब गाड़ी मालिक से बात की तो सारी तस्वीर सामने आ गई। दरअसल गाड़ी झांसी तक गई थी, वहां से लौटते समय हादसा हो गया। उधर शीबूूू की मौत के बाद मां ऊषा जाम स्थल पर बार-बार बेसुध हो रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसीलिए मृतक के पिता शिवनंदन कश्मीर में एक ईंट भट्ठे पर काम करने गए थे। जब यहां से शीबू की मौत की खबर उनके पास पहुंची तो वे बेहाल हो उठे। खबर लिखे जाने तक वे यहां पहुंच नहीं पाए थे।