उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 2009-10 में हुई शिक्षक भर्ती (टीजीटी-पीजीटी) फर्जीवाड़े की जांच शासन ने एससीईआरटी निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह को सौंपी है।
शासन ने चयन बोर्ड से टीजीटी-पीजीटी के चयन से जुड़े प्रपत्र उपलब्ध कराने को कहा है। चयन में फर्जीवाड़े की खबर सबसे पहले ‘अमर उजाला’ ने 21 फरवरी 2012 के अंक में प्रकाशित की थी।
टीजीटी-पीजीटी परिणाम 2009-10 में चयन बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्यों की मिलीभगत से कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन हो गया था जो पहले चरण की लिखित परीक्षा में ही पास नहीं हुए थे।
चयन बोर्ड ने 17 फरवरी 2012 को घोषित परिणाम में सामाजिक विज्ञान के परिणाम में सामान्य श्रेणी में छह और पिछड़ी जाति में एक ऐसे अभ्यर्थी को चयनित घोषित कर दिया, जो लिखित परीक्षा में पास ही नहीं था।
‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद शासन स्तर पर हुई जांच में कई अन्य विषयों के परिणाम में भी फर्जीवाड़ा सामने आया।
शासन की जांच के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. आरपी वर्मा को अपने पद से त्यागपत्र तक देना पड़ा था। शासन ने टीजीटी-पीजीटी के पूरे परिणाम की समीक्षा करने पर इस रिजल्ट में कई बार संशोधन किया।
इस परिणाम को लेकर हाईकोर्ट से भी चयन बोर्ड को कई बार संशोधन के लिए दिशा निर्देश मिले। एससीईआरटी के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने स्वीकार किया कि उन्हें शासन ने शिक्षक भर्ती की जांच की जिम्मेदारी दी है।