वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से रेलवे को जरूर मुनाफा मिल रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को चपत लगने लगा है। कारण कि दिल्ली के लिए स्कैनिया बस के समय पर ही रेलवे ने वंदेभारत एक्सप्रेस को चला दिया। बनारस से दिल्ली के किराए में अंतर नहीं होने और ट्रेन में आरामदायक सफर होने के चलते यात्री वंदेभारत एक्सप्रेस को ही पसंद कर रहे हैं।
वाराणसी से नई दिल्ली का किराया वंदेभारत में चेयरकार का 1760 रुपये तो वहीं एक्जीक्यूटिव चेयरकार का किराया 3310 रुपये है। स्कैनिया बस से वाराणसी से नई दिल्ली का किराया 22़10 था। बनारस से नई दिल्ली का सफर पूरा करने में लगभग 15 से 17 घंटे लगता था। वंदेभारत एक्सप्रेस आठ घंटे में सफर को पूरा कर रही है। लिहाजा किराया और समय दोनों की बचत में वंदेभारत ट्रेन बेहतर है।
यही कारण है कि यात्रियों ने वंदेभारत से नाता जोड़ा और रोडवेज की स्कैनिया को दरकिनार कर दिया। बस सेवा के शुभारंभ से ही घाटा सह रही स्कैनिया को इसी कारण बंद कर दिया गया। वाराणसी से नई दिल्ली स्कैनिया सेवा बंद होने के बाद ग्रामीण डिपो की स्कैनिया बस को मथुरा के लिए चलाई जा रही है।
प्रयागराज, कानपुर होते हुए मथुरा के लिए बस जा रही है। हालांकि उसमें में यात्रियों की संख्या अभी काफी कम है। एआरएम ग्रामीण डिपो ओपी ओझा का कहना है कि यात्रियों के नहीं मिलने के कारण ही वाराणसी-नई दिल्ली स्कैनिया बस सेवा बंद कर दी गई है।