- जिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ से 10 बच्चे करा रहे इलाज
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में इन दिनों टांसिल (मम्स) के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस बीमारी की चपेट में आए आठ से 10 मरीज रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जुकाम, बुखार के बाद गले के दोनों ओर सूजन आ जाती है। एक दो सप्ताह बाद यह संक्रमण समाप्त हो जाता है।
जिला अस्पताल में इस समय 1300 से 1400 की ओपीडी हो रही है। इस समय संक्रमण की चपेट में हर आयु वर्ग के लोग आ रहे है। हालांकि, बच्चों की संख्या इसमें ज्यादा है। प्रतिदिन 200 के करीब बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इसमें से आठ से 10 मरीज टांसिल से पीड़ित होकर इलाज करा रहे है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि गलसुआ के लक्षण दो सप्ताह बाद नजर आने लगते हैं और दवाओं के सेवन से यह ठीक भी हो जाती है। इसे ठीक होने में एक से दो सप्ताह का वक्त लग सकता है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी वायरस के कारण फैलती है। सिरदर्द, बुकार और थकान जैसे इसके लक्षण हैं। ध्यान न देने पर गले में सूजन आ जाती है और थूक गटकने में दिक्कत होने लगती है। आम बोलचाल की भाषा में इसे गलसुआ कहते हैं। वैसे इस बीमारी का कोई विशेष उपचार नहीं है। यह बीमारी कुछ दवाओं के सेवन से धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।
इस तरह कर सकते हैं बचाव
- अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीएं
- गुनगुने नमक वाले पानी से गरारा करें
- आसानी चबाने वाले खाने का सेवन करें।
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यह है लक्षण
- बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द
- खाने की इच्छा न होना
- संक्रमितों के चेहरे पर सूजन के साथ दर्द
- खाना चबाने में परेशानी
- लार ग्रंथियों में सूजन होना