उत्तराखंड में हुई भारी बारिश का असर घाघरा नदी के जलस्तर पर भी पड़ने लगा है। नदी में छोड़े गए करीब छह लाख क्यूसेक पानी के कारण नदी में अचानक बाढ़ आने की आशंका हो गई है। इसके मद्देनजर बुधवार को डीएम दिव्या मित्तल और एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने घाघरा नदी के तलहटी में बसे 22 गांवों में पहुंचकर लोगों से गांव खाली करके सुरक्षित स्थान पर जाने का सुझाव दिया।
धनघटा तहसील के गायघाट दक्षिणी, सरैया, खरैया, कटहा, कंचनपुर, ढोलबजा, गुनवतिया, सीयर कला, तुरकौलिया, आगापुर गुलरिया, चपरा समेत 22 गांव एमबीडी बांध और घाघरा नदी के मध्य बसे हुए हैं। नदी का जल स्तर बढ़ने पर यह गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। डीएम दिव्या मित्तल ने गायघाट दक्षिणी, तिघरा, कंचनपुर आदि गांव में पहुंचकर वहां की स्थिति जानी।
डीएम ने कहा कि घाघरा नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने की आशंका है। ऐसे में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। बाढ़ आने के पहले प्रशासन द्वारा बनाए गए बाढ़ राहत केंद्रों पर लोगों को पहुंच जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घाघरा नदी का जलस्तर बुधवार की देर रात तक अधिक बढ़ जाने की आशंका है। जिसका असर तीन से चार दिनों तक रह सकता है।
उत्तराखंड में हुई अधिक बारिश के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। गांव के लोगों की सुरक्षित रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। डीएम ने एसडीएम, तहसीलदार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी समेत अन्य विभागों के अफसरों को निर्देशित करते हुए कहा कि नदी और बांध के बीच बसे गांवों को जल्द से जल्द खाली करा दें।
गांव के लोगों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। इस मौके पर संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों को भी बुलाकर डीएम ने गांव खाली कराने में प्रशासन का सहयोग करने को कहा। इस मौके पर एसडीएम योगेश्वर सिंह, तहसीलदार रत्नेश तिवारी, थानाध्यक्ष विनय कुमार पाठक आदि मौजूद रहे।