जुनावई क्षेत्र के गांव गढ़ी बिचौला में मेंथा की सूखी फसल को दिखाता किसान। संवाद
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जुनावई व धनारी क्षेत्र में नलकूप फीडर पर लो वोल्टेज आने से किसान परेशान हैं। नलकूप बंद पड़े हैं। बमुश्किल सुबह के समय एक से दो घंटे के लिए नलकूप चल पाते हैं। सिंचाई न होने से पतरिया फीडर से जुड़े 12 गांवों के 600 किसानों की करीब 3000 बीघा मेंथा, बाजरा व अन्य फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें सुल्तानगढ़, गढ़ी बिचौला, पतरिया आदि गांव के 300 से अधिक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने अपनी मेंथा के फसल की देखभाल छोड़ दी है। किसानों का कहना है कि बिजली अफसरों से शिकायत करते हैं, तो बिजली घर से पूरी बिजली मिलने की बात कहकर टाल देते हैं। खेत में फसल सूख गई है, तो अब उसकी देखभाल से कोई फायदा नहीं है।
जुनावई बिजलीघर के पतरिया फीडर पर 20 गांव जुड़े हैं। इनमें से करीब 12 गांवों के निजी नलकूल की विद्युत लाइन पर लो-वोल्टेज आ रहे हैं। गांव गढ़ी बिचौला के किसान युसुफ व गुलाब नवी ने बताया कि 440 वोल्टेज के स्थान पर नलकूपों तक बमुश्किल 110 से 150 वोल्टेज तक पहुंच पा रहे हैं। इतने वोल्टेज में किसानों के नलकूप संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इस समय किसानों के खेतों में मेंथा, बाजरा, पालेज, ज्वार आदि की फसल प्रमुख रूप से खड़ी है। मेंथा की फसल को हर आठ दिन में सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। नलकूप संचालित न होने से फसल सूख गई है। किसानों की फसल में लगाई लागत भी डूब गई है। किसान परेशान हैं, बिजली अधिकारी भी संतोषजनक जबाव नहीं दे रहे हैं।