संभल। दो दशक बीतते जिले की आबादी 25 लाख से अधिक हो गई है। जिले में जिला अस्पताल समेत सीएचसी पीएचसी पर 143 चिकित्सकों की नियुक्ति होनी चाहिए थी, लेकिन महज 58 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिससे मरीज हलकान हैं और निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संभल जनपद में 25 लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और उपचार देने के लिए जिले में जिला अस्पताल के साथ 27 पीएचसी और दस सीएचसी हैं। जिनके लिए 143 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, इनमें से केवल 58 पदों पर ही चिकित्सकों की नियुक्ति है। जिला अस्पताल के लिए कुल 23 पद स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ सिर्फ छह पर नियुक्ति है।
दूसरी ओर ग्रामीण अंचल में 285 स्वास्थ्य उपकेंद्र बने हैं। इनमें कुल 212 एएनएम की नियुक्ति है। वहीं, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 113 हैं। जिसमें 39 नए शामिल हैं। इसमें एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की नियुक्ति की गई है, लेकिन कुल संख्या के सापेक्ष सिर्फ 85 कार्यरत हैं। नतीजा यह है कि पूरे जिले में मानक के अनुसार चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की कहीं नहीं हैं और न ही चिकित्सा सेवा में विस्तार किया गया। ऐसे में कैसे माना जाए कि चिकित्सा सेवाएं बेहतर हैं।
कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट लिख रहे दवाई
जनपद में लचर और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का आलम यह है कि कई अस्पतालों में तो चिकित्सकों की ही तैनाती नहीं है। तो वहीं कई अस्पताल ऐसे हैं, जहां पर चिकित्सक के स्थान पर वार्ड ब्वाय और महिला हेल्थ वर्कर मरीज देखकर दवाएं लिख रहे हैं, जबकि कागजों पर चिकित्सकों की तैनाती यहां है, लेकिन वह मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हजरतनगर गढ़ी की हकीकत सबके सामने है। यहां कागजों में तो चिकित्सकों की पोस्टिंग है लेकिन वह लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। यह बात दीगर है कि वैकल्पिक व्यवस्था में डा. इंदु त्यागी की सप्ताह में तीन दिन के लिए नियुक्ति है लेकिन वह भी नियमित नहीं पहुंच पाती हैं। फार्मासिस्ट मरीजों को दवाएं लिखकर दे रहे हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि कई अस्पतालों में वार्ड ब्याय उपचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरायतरीन और हातिमसराय में तो किसी चिकित्सक की तैनाती ही नहीं हुई है।
जिला अस्पताल में 23 चिकित्सकों में से मात्र छह ही नियुक्त
जिला अस्पताल में सीएमएस का कार्यभार देख रहीं डा. रंजना सिंह बतातीं हैं कि जिला अस्पताल में कुल स्वीकृत 23 में से छह पर नियुक्ति हैं। इसमें भी कई चिकित्सक छुट्टी और इमरजेंसी ड्यूटी या फिर अन्य कार्यों में लगे रहते हैं। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए मांग की जाती रहती है, लेकिन चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं। चिकित्सकों की कमी का खामियाजा केवल मरीज नहीं, बल्कि चिकित्सक भी भुगत रहे हैं। क्योंकि कई चिकित्सक ऐसे भी हैं, जिन्हें ओपीडी के साथ अन्य विभागीय कार्य भी करने पड़ते हैं।