चंदौसी। दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में न्यायालय ने पति, सास, ससुर को दोषी पाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश ने तीनों को सात- सात वर्ष का सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि वादी रामभूप सिंह ने 21 दिसंबर 2017 को थाना गुन्नौर में तहरीर दी थी। तहरीर में बताया था कि उसने अपनी बेटी गुड्डो की शादी करीब तीन साल पहले थाना क्षेत्र के गांव तोतापुर निवासी भानु के साथ थी। शादी के कुछ समय बाद से आरोपी पति, ससुर, सास व अन्य परिजन उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे थे। दहेज में बाइक, सोने की चेन की मांग करते थे। आरोपी उसके साथ आए दिन मारपीट करते थे। रिश्तेदारों के साथ कई बार पंचायत भी हुई, पर आरोपी नहीं सुधरे। 21 दिसंबर 2017 की सुबह गांव तोतापुर से फोन आया। सूचना मिली कि गुड्डो मृत पड़ी है। जाकर देखा, तो उसके शरीर पर चोट के निशान थे। इस मामले में रामभूप की तहरीर पर पुलिस ने पति भानु, ससुर नबाव सिंह, सास कस्तूरी व अन्य परिजनों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश निर्भय नारायण सिंह ने दोनों पक्षों को सुना। मामले में पति, सास व ससुर को दहेज हत्या का दोषी माना। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश निर्भय नारायण सिंह ने पति भानु सिंह, ससुर नबाव सिंह, सास कस्तूरी देवी को सात- सात वर्ष का सश्रम कारावास व पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।