संभल। पहले मौसम की मार और डीएपी की किल्लत झेल चुके किसानों को इन दिनों संभल की मंडी समिति में स्थित इफ्को कृषि सेवा केंद्र पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूरिया लेने हो या फिर एनपीके, हर किसी के साथ दवाई दी जा रही है। खाद के साथ जबरन दी जा रही दवा का न सिर्फ किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
रबी की फसलों की बुवाई के लिए डीएपी जरूरत होती है, लेकिन इसके अभाव में किसानों ने जैसे-तैसे अपनी गेहूं व अन्य फसलों को बोया है। गेहूं की फसल अब अंकुरित होने लगी है और सिंचाई चल रही है। ऐसे में किसानों को यूरिया की जरूरत है। शुक्रवार को मंडी समिति में स्थित इफ्को कृषि सेवा केंद्र पर संभल तहसील क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से तमाम किसान पहुंचे हुए थे। लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई थीं। किसी को यूरिया के बोरे लेने थे तो किसी को एनपीके के।
किसानों को लाइन में लगाकर खाद तो बांटा जा रहा था, लेकिन इसके साथ दवाई भी दी जा रही थी। इस दवाई को लेने के लिए कुछ किसान इच्छुक थे तो कुछ नहीं लेना चाहते थे, लेकिन केंद्र से हर किसी को दवाई दी जा रही थी। शाकिन शोभापुर के मिट्टू सिंह, रसूलपुर धतरा के राम सिंह, करीमपुर के धर्मपाल और पृथ्वीपुर के देवेंद्र ने कहा कि जरूरत तो यूरिया खाद थी, लेकिन साथ में दवाई दी गई। जिसके बदले 160 रुपये का अतिरिक्त भार सहन करना पड़ा।
किसानों को जो चीज चाहिए, वहीं दी जानी चाहिए। खाद लेने वाले किसानों को उनकी बिना मर्जी के किसी भी तरह की कीटनाशक या फिर अन्य दवाई देना गलत है। संभल में यदि खाद के साथ दवा दी जा रही है तो इस प्रकरण को गंभीरता से दिखवाया जाएगा।
हीरा सिंह जीना, उप कृषि निदेशक, संभल