जनपद के मौनपालक इसके बाद मधुमक्खियों के डिब्बों को अलीगढ़ से लेकर राजस्थान, हरियाणा एवं उत्तराखंड ले जाते हैं। वहां मधुमक्खियां सूरजमुखी, नीम, लाही, सहजन आदि से शहद एकत्र करती हैं। जनपद के मौनपालकों के प्रतिवर्ष आठ से दस हजार क्विंटल शहद का उत्पादन लेने का अनुमान है।
जनपद में अच्छी उत्पादकता को देखते हुए गंगोह में बड़े मधुमक्खीपालक अजय सैनी ने शहद प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। उन्हें ऑस्ट्रेलिया से 44 हजार किलो शहद और दस हजार किलो मोम निर्यात करने का ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया से 44 हजार किलो शहद और दस हजार किलो मोम का ऑर्डर मिला है। इसमें से 22 हजार किलो शहद ऑस्ट्रेलिया भेजा जा चुका है। शेष ऑर्डर को पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे न सिर्फ देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी बल्कि स्थानीय मौनपालकों के शहद का भी बढि़या भाव मिलने में मदद मिलेगी। विदेशों में मल्टी फ्लोरा, जामुन, अजवाइन, लीची और तुलसी शहद की काफी मांग है। - अजय सैनी, मधुमक्खी पालक एवं निर्यातक