सहारनपुर। महंगे रॉ मैटीरियल से जूझ रहे काष्ठ हस्तशिल्प निर्यातकों को अब यूक्रेन-रूस के बीच शुरू हुई जंग से बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि यूक्रेन और रूस में अपेक्षाकृत हस्तशिल्प का कम निर्यात होता है। फिर भी माना जा रहा है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प निर्यात को 60 से 100 करोड़ रुपये तक का झटका लग सकता है।
सहारनपुर के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादकों की पूरे विश्व में काफी मांग है। यहां पर साढ़े पांच सौ से अधिक काष्ठ हस्तशिल्प बनाने की इकाइयां हैं। करीब डेढ़ लाख लोग इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं। यहां से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का कारोबार करीब 1400 से 1500 करोड़ रुपये वार्षिक है, जबकि निर्यात 900 से 1000 करोड़ रुपये का होता है। काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध होने से निर्यात को झटका लगने की आशंका है। युद्ध लंबा चला तो निर्यात पर विपरीत असर पड़ना तय है।
विश्व के कई देशों में होता है निर्यात
जिले से वुड कार्विंग का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। 30 से 40 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत मध्यपूर्व के देशों में वुड कार्विंग के उत्पादों का निर्यात होता है। इनमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सउदी अरब आदि देश शामिल हैं। रूस और यूक्रेन में भी 60 से 100 करोड़ रुपये का निर्यात होता है।
बोले निर्यातक
जंग खिंची तो निर्यात होगा प्रभावित
रूस-यूक्रेन के बीच जंग खिंची तो काष्ठ हस्तशिल्प का निर्यात बड़े स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है। इन दोनों देशों में करीब 60 से 100 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प का निर्यात होता है। युद्ध लंबा चला तो निर्यात ऑर्डर कैंसिल होने की आशंका है। --परविन्दर सिंह, निर्यातक।
विदेशी ग्राहक कम आने की आशंका
- जंग की यही स्थिति रही तो यूक्रेन-रूस से ग्राहकों के कम आने की आशंका है। गत वर्ष दो करोड़ रुपये से अधिक का काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात रूस में किया था। इस बार वहां से ग्राहक नहीं आने की आशंका है। जिससे निर्यात प्रभावित हो सकता है। ---- असलम सैफी, निर्यातक।
-एक सप्ताह में होगी स्थिति स्पष्ट
- इस जंग से कितना निर्यात प्रभावित होगा, एक सप्ताह में ही स्थिति स्पष्ट होगी। यदि युद्ध लंबा चला तो जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर विपरीत असर पड़ेगा। हालांकि जनपद से अमेरिका और यूरोपीय देशों में काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात अधिक होता है। ----- रविन्द्र मिगलानी, निर्यातक
प्रभावित हो सकता है हस्तशिल्प मेला
- इस युद्ध से काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग पर विपरीत असर पड़ना तय है। ग्रेटर नोएडा में 30 मार्च से शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय मेले में यूरोपीय ग्राहकों की संख्या में कमी आने की आशंका है। जिसका सीधा असर निर्यात के ऑर्डर पर भी पड़ेगा। --- विवेक शर्मा, निर्यातक।
एक नजर में वुड कार्विंग करोबार
सालाना कारोबार ---- 1400 से 1500 करोड़ रुपये
वुड कार्विंग का निर्यात ---900 से 1000 करोड़ रुपये
वुड कार्विंग कारोबारी रविन्द्र मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR
वुड कार्विंग कारोबारी असलम सैफी- फोटो : SAHARANPUR
वुड कार्विंग कारोबारी विवेक शर्मा- फोटो : SAHARANPUR