-- अवैध रूप से सीमा पार कर आए थे, 2013 से सहारनपुर में रह रहे थे
-- एटीएस ने दो साल पहले पकड़ा था, दूसरे देशों के लोगों के संपर्क में थे
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अवैध रूप से सीमा पार कर सहारनपुर में आकर रह रहे दो बांग्लादेशी भाइयों को लखनऊ की विशेष न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार साल के कारावास की सजा सुनाई है, वहीं 6500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सीमा पार कर आ कर रहे दोनों आरोपियों को एटीएस लखनऊ ने सहारनपुर से गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2020 में एटीएस लखनऊ की टीम ने एक सूचना पर थाना कुतुबशेर क्षेत्र की कमेला कॉलोनी में अवैध रूप से चोरी छिपे रह रहे दो बांग्लादेशी भाइयों मो. इकबाल, मो. फारुख पुत्रगण नूर मोहम्मद को गिरफ्तार किया था, जो मूल रूप से बांग्लादेश के जिला चटगांव के सठकनिया थाना के गांव सादाह मोनूपारा के रहने वाले हैं। इन्हें एटीएस गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी। इनके पास से फर्जीन पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि भी बरामद हुए थे। इनके अमेरिका, म्यांमार, इटली, ब्रिटेन, सऊदी अरब के लोगों से भी संपर्क उजागर हुए थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि वह सन 2007 से भारत के पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रहते हुए 2013 में भी गिरफ्तार हुए थे। दो सजा काटने के बाद बांग्लादेश पहुंचाए जाने के पश्चात दोबारा 2015 में फिर सीमा पार कर भारत में आए। सहारनपुर की कमेला कॉलोनी में आकर नाम व पहचान बदल कर रहे थे। लखनऊ कोर्ट में इन पर दोष सिद्ध हो जाने पर चार साल के कारावास और 6500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
--------------
पहले भी कई मामले आ चुके हैं सामने
सहारनपुर। जिले में संदिग्ध और बांग्लादेशियों के अवैध रूप से रहने के मामले कई बार सामने आ चुके हैं। फरवरी माह में एकता कॉलोनी से भी पिता पुत्र को एटीएस ने पकड़ा था, जो 10 वर्ष से सहारनपुर में अलग-अलग ठिकानों पर नाम बदलकर रह रहे थे। इसी तरह देवबंद से कुुछ दिन पूर्व एक बांग्लादेशी इनामुल हक पकड़ा था। इसके अलावा गंगोह में भी चार बांग्लादेशियों को एक मीट फैक्टरी से पकड़ा गया था। इसके अलावा आकाश पाकिस्तानी जासूस इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को भी सहारनपुर शहर के हकीकत नगर से गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी तरह कई आतंकी संगठनों से जुड़े संदिग्ध सहारनपुर से पकड़े जा चुके हैं।