सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से मंडी समितियों के राजस्व में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद बढ़ गई है। कानून आने के बाद से अब तक मंडी के राजस्व में करीब चार करोड़ रुपये की कमी आई है। अब पुरानी व्यवस्था के बहाल होने से मंडी की आय बढ़ने की संभावना है।
नए कृषि कानूनों के बाद मंडी से बाहर खरीद करने पर मंडी शुल्क समाप्त होने और उत्पादों पर मंडी शुल्क घटने से मंडी समिति के राजस्व में कमी आई। पांच जून को 2020 को कानून बनने के बाद से अब तक सहारनपुर मंडी के राजस्व में करीब चार करोड़ रुपये की कमी आई है। मंडी समिति परिसर से बाहर कारोबार पर मंडी शुल्क से राहत के चलते काफी व्यापार बाहर ही शिफ्ट हो गए। मंडी समिति परिसर में कारोबार करने वाले व्यापारियों से पहले दो प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता था। इसे घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही 46 जिंस पर से मंडी शुल्क हटाकर एक प्रतिशत यूजर चार्ज लगाया गया। इसके अलावा किराना, चावल, राइस मिल, फ्लोर मिल, लकड़ी का कारोबार मंडी समिति परिसर से बाहर होने से भी मंडी शुल्क प्राप्त नहीं हो रहा है। इसके चलते मंडी समिति को राजस्व हानि का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री की कानून वापसी की घोषणा के बाद मंडी में पुरानी व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है। जिसके चलते मंडी समिति की आय में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।
नए कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद मंडी शुल्क में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद बढ़ गई है। अब पुरानी व्यवस्था के तहत मंडी में या मंडी परिसर से बाहर व्यापार करने वालों को मंडी शुल्क देना होगा। इसके अलावा मंडी परिसर से बाहर कारोबार पर भी मंडी समिति का नियंत्रण होगा। इससे मंडी समिति के राजस्व में इजाफा होगा। - अशोक सिंह सोलंकी, मंडी सचिव।