सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों के जर्जर भवनों को चिह्नित कर ध्वस्तीकरण कराया जाना था। मगर विभागीय लापरवाही के चलते अभी तक 50 फीसदी भवन भी ध्वस्त नहीं किए गए हैं। हैरत की बात यह है कि संबंधित अधिकारी जुलाई 2021 में 90 फीसदी विद्यालयों का ध्वस्तीकरण हो जाने का दावा कर रहे थे। जर्जर भवनों को ध्वस्त नहीं किए जाने से हादसा होने का खतरा है।
जनवरी 2021 में विद्यालयों के जर्जर भवनों की सूची बनाकर शासन को भेजी गई थी। जिले में करीब 277 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। सबसे ज्यादा हालत खराब मुजफ्फराबाद ब्लाक के विद्यालयों की मिली थी। वहां 40 भवन जर्जर पाए गए थे। इसके अलावा सरसावा क्षेत्र में 07, नागल क्षेत्र में 18, गंगोह क्षेत्र में 30, साढ़ौली कदीम क्षेत्र में 21, रामपुर मनिहारान क्षेत्र में 08, बलियाखेड़ी ब्लाक क्षेत्र में 13, देवबंद क्षेत्र में 09 भवन चिह्नित किए गए। इनमें से 125 जर्जर भवनों को पहले चरण में ध्वस्त किया जाना था। इनमें कई विद्यालय भवन तो ऐसे हैं, जिनकी छतों पर पेड़ तक उग आए थे। खास बात यह है कि अब कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं और बरसात का मौसम है। ऐसे में हादसा होने का खतरा बना हुआ है। साथ ही जर्जर के नजदीक से गुजरने वाले राहगीरों को भी खतरा रहता है।
विद्यालयों के जिन जर्जर भवनों को चिह्नित किया गया था, उनमें से करीब 50 फीसदी भवन ध्वस्त करा दिए गए हैं। दरअसल, भवनों को ध्वस्त करने की एक पूरी प्रक्रिया है, जिसमें अकेला बेसिक शिक्षा विभाग शामिल नहीं है। अन्य विभाग भी इसमें शामिल हैं। इसलिए थोड़ा विलंब हो रहा है। मगर जल्द ही सभी जर्जर भवनों को गिरा दिया जाएगा।
- वैभव जैमिनी, जिला समन्वयक, निर्माण।