सहारनपुर। हिंदी हमारी आत्मा है, हमारा खून है, भारत माता का ताज है और संस्कृत की संवाहक है। मातृभाषा ने स्वीकार्यता और सहनशीलता के भाव से ही भाषाई भिन्नता को भी सहजता से स्वीकार किया है। तमाम परिवर्तन स्वीकार किए। यही वजह है आज देश में हिंदी बोलने और समझने वालों की संख्या बढ़ी है। यह विचार शनिवार को सरस्वती विहार सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत आयोजित कार्यशाला के दौरान व्यक्त किए।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि हिंदी के पूर्व प्रवक्ता एवं आरएसएस के विभाग प्रचार प्रमुख जगदानंद शर्मा, विद्यालय प्रबंधक अमर गुप्ता और प्रधानाचार्य राजीव कुमार शुक्ला ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना पेश की। इसके बाद छात्र छात्राओं को गद्य एवं पद्य लेखन का अंतर समझाया और काव्य में अलंकार के प्रयोग से आने वाली सुंदरता के विषय में बताया। इस दौरान छात्र और छात्राओं ने भी कविताओं के रूप में अपनी रचनाएं पेश कीं।
मुख्य अतिथि जगदानंद शर्मा ने हिंदी दिवस मनाने की प्रासंगिकता बताई। कहा कि वैदिक काल में संस्कृत, फिर पाली, प्राकृत और अपभृंस के बाद हिंदी का विकास हुआ। उन्होंने कहा हिंदी एक हजार वर्ष पुरानी है और संस्कृत की संवाहक है। इसे आधुनिक हिंदी बनाने का श्रेय भारतेंदु हरिश्चंद्र को जाता है। आज देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं और करीब 80 करोड़ लोग हिंदी समझते हैं। हिंदी स्वतंत्र भाषा है, इसकी स्वीकार्यता और सहनशीलता अनूठी है। तमाम परिवर्तन हिंदी ने सहज स्वीकार किए हैं।
विद्यालय प्रबंधक अमर गुप्ता ने कहा किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति और मातृभाषा से होती है। इसलिए ऐसे आयोजन बेहद उपयोगी हैं। बच्चों को इससे सीखना चाहिए। प्रधानाचार्य राजीव कुमार शुक्ला ने कहा कि हिंदी मन से मन को जोड़ने वाली भाषा है, हम तो उन लोगों में से हैं जो हिंदी में सोचते हैं, हिंदी सुनते और बोलते हैं और हिंदी में जीते हैं। हम अपनी भाषा में अपने विचारों को सशक्त रूप से दूसरे तक पहुंचा सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन नीना भाटिया ने किया।
छात्र और छात्राओं ने सुनाई रचनाएं
छात्र राघव शर्मा ने सुनाया, देवनागरी से जन्मी, महाभारत और रामायण में पली बढ़ी, कविता और कहानियों में खेली है, देश की लाड़ली बेटी है हिंदी। मंद दोहा चौपाई, इसकी शोभा बढ़ाते हैं, व्यक्ति छोटा हो या बड़ा, सब इसमें सम्मान पाते हैं।
छात्रा रियांशी खटाना ने सुनाया, हाथ में लेकर इक दूजे का हाथ चलेंगे, बढ़ेंगे निरंतर हर दम यूं ही, इक दूजे के साथ चलेंगे। पंछी हो चाहे हो पशु, हर किसी को आजादी प्यारी है, पड़ जाएगी हर किसी पर भारी यह जो एकता हमारी है।
छात्र दिव्यांश तिवारी ने सुनाया, मेरी मां मेरी मां प्यारी मां प्यारी मां, जन्म मुझे देती है, चलना मुझे सिखाती है, खुद रोती पर मुझे हंसाती है। कभी मेरी दोस्त तो कभी गुरू बन जाती है।
छात्रा सलोनी गुप्ता ने सुनाया, उड़ रही आकाश में मैं, पर इसकी दूरी नहीं नाप पा रही हूं, दुनिया पूरी देखी मैंने, पर ये दुनिया नहीं पहचानी मैंने, मैं उड़ सकती हूं, पर अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पा रही हूं।
छात्रा विधि तोमर ने सुनाया, शब्दों का खेल है कविता, भावनाओं का मेल है कविता।
छात्रा किरण सोनी और छात्र मानवीर सिंह भड़ाना ने वर्तनी में होने वाली त्रुटियों के बारे में बताया, जो आम तौर पर लिखने के दौरान हो जाती हैं।
-- राघव शर्मा- फोटो : SAHARANPUR
-- दिव्यांशु तिवारी- फोटो : SAHARANPUR
-- रियांशी खटाना- फोटो : SAHARANPUR
-- विधि तोमर- फोटो : SAHARANPUR
-- किरण सोनी- फोटो : SAHARANPUR
सरस्वती विहार सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अमर उजाला द्वारा हिन्दी पर आयोजित गोष्ठी में स्वागत गान- फोटो : SAHARANPUR