सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में मतदाताओं का मिजाज बदलता नजर आया। मतदान का शुरुआती एक घंटा सामान्य रहा, लेकिन बाद में कोई समीकरण काम नहीं आया। चुनाव ध्रुवीकरण की तरफ जाता नजर आया। जिस तरह 2014 का चुनाव हुआ था, इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला। जिले के खत्ताखेड़ी, ताहरपुर खुर्द, शाहपुर गाड़ा और देवबंद जैसे मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखाई दीं।
हालांकि, हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में सुबह-शाम मतदान ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन मुस्लिम क्षेत्र में मतदान प्रतिशत अधिक रहा। सहारनपुर जिले में शाम छह बजे तक 66.74 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें कैराना की दो विधानसभा नकुड़ और गंगोह भी शामिल है। जिले में सबसे अधिक बेहट विधानसभा में 72.34 और सबसे कम गंगोह विधानसभा में 63.88 प्रतिशत मतदान हुआ है।
राजपूतों के मतदान केंद्रों ने बढ़ाई बेचैनी
शिमलाना, बड़गांव, रणखंडी और खुड़ाना, मौरा, नानौता, झबीरण आदि गांव राजपूत बाहुल्य केंद्रों पर कम मतदान हुआ। दोपहर बाद युवाओं ने जोश दिखाया।
ये मानी जा रही ध्रुवीकरण की वजह
दरअसल, 16 अप्रैल को मुख्यमंत्री का रोड शो उन रास्तों से निकाला गया जो हिंदू बाहुल्य क्षेत्र हैं। इसका पलटवार करते हुए 17 अप्रैल को प्रियंका गांधी का रोड शो मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से निकाला गया। इनके अलावा गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद का एक बयान भी काफी चर्चाओं में रहा था।
कांग्रेस प्रत्याशी ने एक जनसभा में कहा था कि अगर भाजपा आई तो सबसे पहले मेरा और तुम्हारा इलाज होगा। सबसे महत्वपूर्ण रहा कि मतदान शुरू होते ही हर तरफ ध्रुवीकरण की चर्चा शुरू हो गई। इसके बाद मानों चुनाव की तस्वीर ही बदल गई हो। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में लंबी कतारें देखने को मिलीं। कांग्रेस और बसपा प्रत्याशी के मुस्लिम होने के नाते माना जा रहा था कि इस बार मुस्लिम वोटरों में बंटवारा होगा, लेकिन मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसा कम देखने को मिला।
यह भी पढ़ें: बिजनौर लोकसभा सीट: पुरकाजी-मीरापुर विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, बसपा ने मुस्लिम वोटों में की सेंधमारी