एसबीडी जिला अस्पताल को खुद इलाज की दरकार
सहारनपुर। प्रतिदिन हजारों मरीजों को इलाज देने वाला एसबीडी जिला अस्पताल अधिकारियों की अनदेखी की वजह से बदहाल है। दान में मिली सुविधाओं को छोड़ दें तो अस्पताल की अपनी व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। अमर उजाला की टीम ने रविवार को अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत जानने का प्रयास किया। कहीं टंकियों से पानी बहता मिला तो कहीं शौचालयों में गंदगी फैली मिली। पेश है रिपोर्ट...
पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं
एसबीडी जिला अस्पताल में अस्पताल की ओर से पेयजल के लिए फ्रिज लगवाया गया था। फ्रिज को रखने के लिए कमरा बनाया गया है, मगर फ्रिज साल भर से बंद पड़ा है। अस्पताल की मुख्य इमारत के कोने पर लगी टंकी महीनों से खराब है, जिससे 24 घंटे पानी टपकता रहता है। मुख्य इमारत ही में पहली मंजिल पर जनरल वार्ड बना है, जिसमें करीब 50 मरीज भर्ती होंगे। यहां पेयजल के लिए केवल एक टंकी लगी है, जो खराब रहती है।
शौचालयों में गंदगी और दुर्गंध
एसबीडी जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड और हड्डी वार्ड के दोनों शौचालयों में ठीक से सफाई नहीं होने की वजह से दुर्गंध है। शौचालयों की फ्लैश टूटी पड़ी हैं। इसी तरह मुख्य इमारत में बने शौचालय की हालत खराब है। नियमित रूप से सफाई नहीं होने से शौचालय में दुर्गंध है। महिला शौचालय की टंकी खराब होने से कई दिन से पानी बह रहा है।
खिड़कियों की जालियां फटी हैं
मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए वार्डों की खिड़कियों पर जालियां लगी हुई हैं। जालियां बेहद पुरानी होने की वजह से कई जगहों से फटी हुई हैं, जिसकी वजह से वार्डों में मच्छर घुस रहे हैं और मरीज परेशान हैं।
रैन बसेरे का हाल बेहाल
सर्जिकल वार्ड के ठीक सामने रैन बसेरा बना है। रैन बसेरा तीमारदारों के ठहरने के लिए होता है, मगर रैन बसेरे में डाले गए बेड मात्र औपचारिकता है, जिन पर गद्दे और बेड शीट नहीं हैं। रैन बसेरे में अलग से शौचालय भी बना है, जिसमें कचरा भरा हुआ है। ऐसे में तीमारदारों को वार्ड के बाहर बरामदे में रात गुजारनी पड़ती है।
शौचालयों के जीर्णोद्धार के लिए कार्य आदेश जारी किए गए हैं। पेयजल के लिए आरओ को ठीक कराया जाना है, जिसके लिए कंपनी से बात चल रही है। रही बात टंकियों के टपकने की और रैन बसेरे में गंदगी की तो इस संबंध में संबंधित को निर्देशित किया जाएगा।
डॉ. आभा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल