शेखपुरा गांव में शांतिपूर्ण तरीके से भीड़ ने थाना प्रभारी चंद्रसेन सैनी को ज्ञापन सौंप दिया था। भीड़ भी अपने-अपने घरों की तरफ चली गई। थोड़ी देर बाद करीब 70-80 युवाओं की भीड़ अचानक निकलकर आई और चौकी की तरफ बढ़ने लगी।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर सबकुछ शांत होने के बाद युवाओं की भीड़ को किसने उकसाया, दूसरा सवाल यह है कि भीड़ में शामिल सभी 15 से 30 साल के बीच के रहे होंगे। इसके बावजूद पुलिसकर्मी उनकी मंशा नहीं भांप सके। जिस तरीके से यह पूरा घटनाक्रम उससे साफ है कि युवाओं को किसी ने उकसाकर पुलिस चौकी की तरफ भेजा था।
जैसे-जैसे भीड़ नारेबाजी करते हुए चौकी की तरफ बढ़ रही थी इससे उनकी मंशा साफ दिख रही थी किसी योजना के तहत आए हैं। हालांकि मौके पर मौजूद चार-पांच पुलिसकर्मियों ने पहले उन्हें समझाने की कोशिश की और नहीं मानने पर लाठियां फटकार दीं। इसके बाद तो मानों उपद्रवियों को मौका मिल गया और ताबड़तोड़ पत्थरबाजी शुरू कर दी। करीब आधे घंटे तक यह बवाल चला। उपद्रवियों के हाथ में जो भी आया, उसे फेंकना शुरू कर दिया। चाहे ईंट के टुकड़े आए या फिर पत्थर।
बवाल के बाद सड़क पर पड़े पत्थर और ईंटों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि चंद पुलिसकर्मियों ने किस तरह उपद्रवियों से खुद को बचाया होगा। स्थिति यह थी कि सहारनपुर-देवबंद मार्ग यातायात कुछ देर के लिए थम गया। वाहन चालक भी वापस मोड़कर भागते दिखाई दिए। पथराव को देखकर कुछ लोग सहम गए। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया, तब जाकर उपद्रवियों को खदेड़ा गया।
...तो क्या चौकी को नुकसान पहुंचाने आई थी भीड़
महंत यति नरसिंहानंद के बयान को लेकर चारों तरफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। शुक्रवार रात बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद तहसील में भी ऐसा ही बवाल हुआ था। दिन में मस्जिद में विरोध-प्रदर्शन के बाद देर रात वहां पर तैनात पुलिस पर पथराव कर दिया गया। इसके अलावा भी कई जगह घटना हो चुकी हैं। ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि वहां की घटना को देखकर यहां पर बवाल तो नहीं किया गया।