अल्लाह की इबादत के साथ मोहब्बत, भाईचारे का पैगाम भी आम करें
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने सोमवार को रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। कहा कि रमजान में अल्लाह तआला की इबादत के साथ प्रेम, भाईचारा व सौहार्द का पैगाम आम करें। इंसानियत, हमदर्दी, गरीबों की सेवा, प्रेम भाईचारा, सौहार्द आदि को अपने आचार-विचार, व्यवहार में आत्मसात करने से ही इस पाक महीने का मकसद पूरा हो सकता है। मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगें। सदका, जकात, ख़ैरात देकर गरीबों की मदद करें।
सवाल- नकुड़ निवासी जमाल ने मालूम किया कि वह रोजे की हालत में रोज बाइक से सफर करते हैं। रास्ते में धूल और मिट्टी उनके मुंह और नाक के जरिए उनके हलक में जाती है। क्या इससे उनका रोजा तो नहीं टूटता।
जवाब- शरीयत के अनुसार रोजे की हालत में बिना इख्तियार गर्द गुबार, धूल और मिट्टी हलक में चले जाने से रोजा नहीं टूटता। यदि किसी ने जानबूझकर कर इसको हलक में लिया तो रोजा टूट जाएगा।
सवाल- शामली निवासी मासूम अली ने पूछा की उनके ताया माली हालात से बहुत परेशान हैं। क्या उनको जकात दी जा सकती है। शरीयत का इस पर क्या हुकुम है।
जवाब- जी हां ! शरीयत के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के रिश्तेदार यानी ताया, चाचा गरीब हैं और जकात लेने के मुस्तहिक हैं तो उनको जकात दी जा सकती है।
सवाल- मोहल्ला गालिब रसूल निवासी इब्राहिम ने मालूम किया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी बहन की शादी के लिए रकम रखी है तो क्या उस पर भी जकात वाजिब होगी।
जवाब- शरीयत के अनुसार अगर निसाब के मुताबिक रकम है तो जकात वाजिब है।