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हिंदी हैं हम -- मुश्किल लगता था हिंदी बोलना, लेकिन नामुमकिन नहीं

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- लोकेश एम, मंडलायुक्त, सहारनपुर (हिंदी हैं हम) - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। बचपन से कन्नड़ बोलते रहे, पांचवीं तक की पढ़ाई में हिंदी लिखना तो सीखा मगर ठीक से बोल नहीं पाते थे, क्योंकि पूरा परिवेश कन्नड़ भाषा का ही था। सिविल सर्विस में चयनित हुए तो यूपी कैडर मिल गया, तब लगा कि वह हिंदी कैसे बोलेंगे, कैसे समझेंगे। यह मुश्किल लगता था, मगर नामुमकिन नहीं था, क्योंकि प्रयास करते रहे, पढ़ने के साथ हिंदी लिखने की आदत बढ़ाई और आज सब आसान हो गया। हिंदी में रच बस गए हैं। कन्नड़ तभी बोलते हैं, जब अपने घर कर्नाटक जाते हैं या फिर परिजनों से फोन पर बात होती है। हिंदी सीखने, पढ़ने और बोलने का यह अनुभव है सहारनपुर मंडलायुक्त लोकेश एम और एसएसपी डॉ. एस चनप्पा का। पेश है दोनों अधिकारियों से हिंदी भाषा को लेकर उनके अनुभव पर आधारित रिपोर्ट...
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बेटी और बेटा भी बोलते हैं शुद्ध हिंदी : लोकेश एम
मंडलायुक्त लोकेश एम बताते हैं कि उनकी पढ़ाई बंगलुरू में हुई। कक्षा छह में हिंदी की शुरुआत हुई। घर और विद्यालय में कन्नड़ और अंग्रेजी ही बोली जाती थी। फिर बीडीएस करके प्रैक्टिस करने लगे, तब भी कन्नड, तेलगू और अंग्रेजी ही आम बोलचाल में रही। हालांकि तब तक बॉलीवुड के हिंदी गीत और गणेश चतुर्थी पर हिंदी भजन जरूर सुनते थे। वर्ष 2005 में यूपीएससी में चयनित हुए और यूपी कैडर मिला। इसके बाद मसूरी स्थित अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान हिंदी लिखना और बोलना सीखा। पहली बार अलीगढ़ में तैनाती हुई, तब तक हिंदी बोलने में कठिनाई होती थी, मगर कौशांबी में जिलाधिकारी बने तो हिंदी बोलने पर पकड़ बना ली। हिंदी बहुत अच्छी भाषा है, इसे जल्द ही अच्छी तरह बोलना सीख लिया। 11 साल यूपी में रहने के बाद जब प्रति नियुक्ति पर वापस कर्नाटक गया तो वहां भी हिंदी बोलता था, जबकि वहां लोग कन्नड़ बोलते थे। उनकी बेटी और बेटा यूपी में ही रहते हुए बेहद शुद्ध हिंदी बोलनी सीख गए और शादी, मुहूर्त, लग्न जैसे शब्द बोलते हैं। उन्होंने बताया यूपी और हिंदी से इतना प्रेम मिला कि कभी अहसास नहीं होता कि हम दक्षिण भारतीय हैं।
पांचवीं तक हिंदी पढ़ ही नहीं पाए : चनप्पा
एसएसपी डॉ. एस चनप्पा कर्नाटक के जनपद बालकोट के रहने वाले हैं। इंटर तक की पढ़ाई सरकारी विद्यालय से हुई। पांचवीं से 10वीं तक ही हिंदी विषय की पढ़ाई हुई, जबकि उसके बाद बीएससी (कृषि) धारवाड़ यूनिवर्सिटी से और एमएससी (कृषि) और पीएचडी पूसा यूनिवर्सिटी दिल्ली से की। पूरा परिवेश कन्नड़ भाषा का था, जब यूपीएससी में चयनित हुए तो कुछ दोस्तों के साथ हिंदी लिखना और बोलना सीखा। नौकरी में आने पर फरियादी की सुनवाई में हिंदी समझना और बोलने में कठिनाई होती थी। अब कोई कठिनाई नहीं है। आसानी से हिंदी बोलते हैं और लोगों की समस्याएं सुनने के साथ ही पत्राचार और प्रार्थनापत्रों पर आदेश भी हिंदी में ही करते हैं।

- डा. एस चनप्पा, एसएसपी- फोटो : SAHARANPUR

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