इसके अलावा वह अपने साथ महिला को इसलिए रखते थे कि वह सिक्योरिटी पर तैनात जवानों को बातों में उलझा लेती थी। गिरोह के सभी सदस्य अलग-अलग होते थे। अगर सिक्योरिटी उनकी दवाई देख भी लेती थी तो वह खुद को बीमार बता देते थे। सिक्योरिटी को झांसा दे देते थे कि उनका उपचार चल रहा है और कई माह बाद सऊदी अरब से लौटना होगा। ऐसे में एक साथ इतनी मात्रा में दवाई लेकर जा रहे हैं। जिससे बार-बार न आना पड़े। हालांकि, पुलिस आरोपियों की इस कहानी पर यकीन नहीं कर रही है, लेकिन जिस तरीके से आरोपियों ने यह बताया है तो उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
उत्तराखंड के मंगलौर से लाते थे दवाई
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे दवाई की खेप उत्तराखंड के मंगलौर से लेकर आते थे। वहां पर एक व्यक्ति उन्हें यह खेप देता था। वह व्यक्ति कौन है और गिरोह में कितने सदस्य है, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अब पुलिस मंगलौर के उस व्यक्ति को तलाश कर रही है।
वहीं, आशंका यह भी जताई जा रही है कि दवाई की यह खेप नकली भी हो सकती है। इस वजह से दवाई को जांच के लिए भेजा गया है। यह भी पता किया जा रहा है कि आरोपियों का कोई साथी सऊदी अरब में तो नहीं है। जो इस खेल में शामिल है।