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मेडिकल उपकरणों पर धूल, चादरें फटी और फैली गंदगी

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राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करते कमिश्नर लोकेश एम - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को मेडिकल कॉलेज कितना तैयार है, इसका खुलासा बुधवार को मंडलायुक्त के निरीक्षण में हो गया। मंडलायुक्त लोकेश एम मेडिकल कॉलेज के हालात को देखकर हैरान रह गए। क्योंकि एक ओर जहां मेडिकल सामानों पर धूल और जंग लगा मिला, वहीं मरीजों के बेड की चादरें फटी मिलीं। इसके अलावा वार्डों से चिकित्सक नदारद थे। अपर निदेशक चिकित्सा को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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मंडलायुक्त लोकेश एम बुधवार शाम चार बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने आपातकालीन कक्ष का निरीक्षण किया, जहां चिकित्सक नहीं मिले। कक्ष में दो नर्स और दो प्रशिक्षु चिकित्सक ही मिले। मेडिकल उपकरणों पर धूल जमी मिली। मरीजों के बेड की चादरें फटी मिलीं। दवाइयों के रखरखाव में भी लापरवाही नजर आई। जगह-जगह फर्श टूटा मिला और दीवारों पर सीलन की वजह से गंदगी मिली। शौचालय में शीट तक टूटी मिली। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट में भी रखरखाव उचित नहीं मिला। इस पर मंडलायुक्त ने नाराजगी व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी को मौके पर बुलवाकर फटकार लगाई, साथ ही स्पष्टीकरण देने और व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्घ कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर पुन: व्यवस्थाओं को परखेंगे। यदि सुधार नहीं हुआ तो प्राचार्य सहित संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। इस दौरान अपर निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अनिता जोशी भी मौजूद रहीं।
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450 संविदा कर्मी, मौके पर एक नहीं मिला
मेडिकल कॉलेज में अवनी परिधि सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से 450 संविदाकर्मी कार्यरत हैं, मगर निरीक्षण में एक भी मौजूद नहीं मिला। मंडलायुक्त ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कर्मियों की शिफ्टवार सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कर्मियों के बारे में पूछने पर भी अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। इसमें गड़बड़ी की आशंका है, क्योंकि कर्मियों के वेतन के नाम पर मोटी धनराशि खर्च होती है।
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खुले में पड़ा मिला बायो मेडिकल वेस्ट
निरीक्षण के दौरान बायो मेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा मिला, जो अस्पताल परिसर में ही पीछे की तरफ डाला हुआ था, जबकि बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में डालना दंडनीय अपराध है। मंडलायुक्त ने इस पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई।
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