बताया गया कि अरमान मलिक ही निर्वाचन आयोग में डाटा ऑपरेटर था, जबकि अब पता चला है कि आदित्य और नितिन भी डाटा ऑपरेटर थे। अरमान मलिक मध्य प्रदेश के हरदा का रहने वाला है और निर्वाचन आयोग में डाटा ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुका है। उसी ने विपुल सैनी को लॉगिन और पासवर्ड बताया था, जिसके जरिये विपुल सैनी मतदाता पहचान पत्र बना रहा था। बीते तीन महीने में वह 10 हजार से ज्यादा पहचान पत्र बना चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस. चन्नपा ने बताया कि आरोपी विपुल सैनी ने यहां के नकुड़ इलाके में अपनी कंप्यूटर की दुकान खोल रखी थी। वेबसाइट में उसी पासवर्ड के जरिये लॉगइन करता था, जिसका इस्तेमाल आयोग के अधिकारी करते थे। आयोग को कुछ गड़बड़ी का अंदेशा हुआ और जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी। वहीं एजेंसियों की जांच के दौरान विपुल सैनी शक के दायरे में आया था। जांच में विपुल सैनी के बैंक खाते में 60 लाख रुपये पाए गए, जिसके बाद खाते से लेनदेन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। खाते में इतनी रकम कहां से आई, इसकी जांच की जाएगी।
आयोग ने दिया बयान, डाटाबेस है सुरक्षित
निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने दिल्ली में कहा कि सहायक मतदाता सूची अधिकारी (एईआरओ) नागरिकों को सेवा प्रदान करते हैं और मतदाता पहचान पत्र की प्रिंटिंग और समय पर वितरण की जिम्मेदारी उनकी होती है। प्रवक्ता ने कहा, एईआरओ कार्यालय के एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने अवैध रूप से अपना आईडी एवं पासवर्ड सहारनपुर के नकुड़ में एक निजी अनधिकृत सेवा प्रदाता को दी, ताकि वह कुछ वोटर कार्ड छाप सके। प्रवक्ता ने कहा, दोनों व्यक्ति गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का डाटाबेस पूरी तरह सुरक्षित है।