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यूक्रेन में जिले के 86 छात्र फंसे थे, 30 घर लौटे

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सीएमएस की बेटा यूक्रेन से लौटने के बाद केशव चन्द्रा मॉ डा मनोहरमा के साथ - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। यूक्रेन में जिले के 86 विद्यार्थी फंसे थे, जो सभी सकुशल निकल गए हैं। इनमें से 30 छात्र छात्राएं अपने घर लौट आए हैं। बृहस्पतिवार को पांच छात्र लौटे हैं। बाकी 56 विद्यार्थी रोमानिया, जर्मनी और हंगरी में हैं। जिन्हें लाने की प्रक्रिया चल रही है।
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जनपद से 86 विद्यार्थी एमबीबीएस और अन्य कोर्स करने के लिए यूक्रेन में गए थे। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में ये छात्र-छात्राएं फंस गए थे। एडीएम वित्त रजनीश मिश्रा ने बताया कि जनपद के सभी छात्र-छात्राएं सुरक्षित यूक्रेन से निकल गए है। 86 विद्यार्थियों में से 30 छात्र-छात्राएं जनपद में सकुशल पहुंच गए है। इनमें बृहस्पतिवार को पांच छात्र घर आए हैं। 20 छात्रों के फोन रिसीव नहीं हुए हैं। इनके अलावा हंगरी बॉर्डर पर आठ छात्र, हंगरी एयरपोर्ट पर एक छात्र, जर्मनी में एक छात्र, पोलैंड बॉर्डर पर तीन छात्र, रोमानिया बॉर्डर पर 13 छात्र, रोमानिया एयरपोर्ट पर पांच छात्र, मालदोवा बॉर्डर पर एक छात्र, सोल्वे एयरपोर्ट पर एक छात्र मौजूद है।
सायरन बजते ही बंकर में छिपना पड़ता था : केशव
सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. रमेश चंद्रा और जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. मनोरमा का बेटा केशव चंद्रा यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे हैं। माता-पिता यहां टेंशन में थे। केशव चंद्रा बृहस्पतिवार को अपने घर लौट आए हैं। केशव ने बताया कि हमले के पहले ही दिन एक बम धमाका कॉलेज से 30 किलोमीटर दूरी पर हुआ था, जिसकी गूंज कॉलेज तक सुनाई दी थी। दिन में कई बार खतरे का सायरन बजता था और उन सबको हॉस्टल में बने बंकर में छिपना पड़ता था। बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने की वजह से उन्हें 24 घंटे खुले में रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
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इरफान को सामने देख छलक पड़े परिजनों के आंसू
सहारनपुर। यूक्रेन के तेरनोपिल शहर से एमबीबीएस कर रहे माहीपुरा निवासी इरफान बृहस्पतिवार को सकुशल अपने घर लौट आए। इरफान को दिल्ली से लेने के लिए बड़े भाई मोहसिन और मामा आफताब आलम एयरपोर्ट पहुंचे थे। मामा और बड़े भाई को सामने देख इरफान के आंसू छलक पड़े, जिसके बाद मोहसिन और मामा आफताब भी अपने आंसुओं को बहने से नहीं रोक सके। इरफान ने बताया कि यूक्रेन पर हमले के बाद से उनको उनके हाल पर छोड़ दिया गया। वह अपने खर्च से बस किराए पर करके रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे, तो कुछ उम्मीद जगी, लेकिन बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने की वजह से हालत खराब थे। उसे 36 घंटे बॉर्डर पर खड़े रहना पड़ा, लेकिन अंतत: सभी की दुुआओं और सरकार के प्रयास से वह सकुशल लौट आए हैं। इरफान को सकुशल घर पर देख पिता कल्लन खान, मां असमा, बहन असरा और अन्य परिजन खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। उधर, शहर की कृष्ण कुंज कॉलोनी निवासी छात्र सूर्यांश कपिल भी बृहस्पतिवार अपने घर लौट आए है।

यूक्रेन से लौटा इरफान अपने परिवार के साथ- फोटो : SAHARANPUR

यूक्रेन से लौटे सूर्यांश कपिल अपने परिवार के साथ- फोटो : SAHARANPUR

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