उत्तर प्रदेश में वित्त विभाग ने सोमवार को स्वशासी संस्थाओं में कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष तय करने का शासनादेश जारी कर दिया।
शासनादेश में गैर जरूरी पदों को समाप्त करने का भी निर्देश दिया गया है। स्वशासी संस्थाओं को इस व्यवस्था को लागू करने से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन करते हुए प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
गौरतलब है कि वित्त विभाग की अंतिम मंजूरी के बाद ही स्वशासी संस्थाएं अपने यहां रिटायरमेंट की आयु सीमा 60 साल कर सकेंगी। उम्मीद की जा रही है कि स्वशासी संस्थाओं में काम कर रहे 50 हजार कर्मचारियों को इससे फायदा होगा।
प्रदेश की डेढ़ दर्जन स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारी अभी 58 वर्ष की उम्र में ही रिटायर हो जाते हैं। इन संस्थाओं से जुड़े कर्मचारी संगठन लंबे अरसे से राज्य कर्मियों की तरह रिटायरमेंट की आयु सीमा 60 वर्ष करने की मांग कर रहे थे।
1 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। सचिव वित्त अजय अग्रवाल ने अब शासनादेश जारी कर स्वशासी संस्थाओं को इस संबंध में जरूरी कार्यवाही करने का रास्ता साफ कर दिया है।
सचिव वित्त ने प्रमुख सचिवों और सचिवों से कहा है कि वे अपने नियंत्रण वाली स्वशासी संस्थाओं में इसके लिए तेजी से कार्यवाही कराएं।
इस तरह करनी होगी कार्यवाही
- स्वशासी संस्थाओं को सबसे पहले कम उपयोगी व गैर जरूरी पदों को समाप्त करने की कार्यवाही करनी होगी।
- सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाने से बढ़ने वाले खर्च का संस्था को आकलन करना होगा।
खर्च कहां से पूरा होगा इसकी व्यवस्था करते हुए प्रस्ताव गवर्निंग बॉडी से पास कराकर संस्था उसे संबंधित विभाग को भेजेगी।
- प्रशासकीय विभाग (स्वशासी संस्था जिस विभाग से जुड़ी है) देखेगा कि प्रस्ताव में वित्तीय आकलन ठीक से किया गया है या नहीं।
- विभाग अपनी संस्तुति के साथ प्रस्ताव वित्त व्यय नियंत्रण अनुभाग को भेजेगा जो वित्त विभाग की सहमति प्राप्त करेगा।
- वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद प्रशासकीय विभाग उम्र बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पर कैबिनेट का अनुमोदन प्राप्त करेगा। इसके बाद वित्त विभाग उम्र बढ़ाने संबंधी शासनादेश जारी करेगा।
इन स्वशासी संस्थाओं के कर्मियों को मिलेगा लाभ
- उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण संस्थान
- भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण
- राज्य ललित कला अकादमी
- ग्रेटर नोएडा
- लीडा
- जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
- हिंदी संस्थान, संस्कृत संस्थान, उर्दू अकादमी, फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी, भाषा संस्थान और सिंधी अकादमी।
- मत्स्य पालक विकास अभिकरण
- संगीत नाटक अकादमी
- अयोध्या शोध संस्थान