बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल में रविवार को ड्यूटी के दौरान दो जूनियर रेजिडेंट की पिटाई के विरोध में अस्पताल और ट्रामा सेंटर के रेजिडेंट की हड़ताल से पहले दिन ही व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। दूर दराज से आए मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज ही लौट गए। उधर, दोपहर 12 बजे ही आधे से अधिक विभागों की ओपीडी भी बंद हो गई। उधर बीएचयू अस्पताल में प्रवेश के लिए सिंह द्वार के पास बलिया निवासी अरविंद सिंह(50) दवा खरीदने गए थे, इसी बीच सीढ़ी चढ़ते समय गिर गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
साथी की पिटाई से नाराज रेजिडेंट ने सुबह छह बजे से ही वार्ड, ऑपरेशन थियेटर में अपनी सेवाएं ठप कर दीं। सुबह 8 बजे जब ओपीडी शुरू हुई तो वहां भी नहीं गए। ओपीडी में सीनियर डॉक्टर आए, लेकिन उन्होंने भी मरीजों को नहीं देखा। हालत यह रही कि अधिकांश विभागों की ओपीडी दोपहर 12 बजे तक ही चल सकी। ऐसे में मरीज ओपीडी के बाहर पर्चा लेकर डॉक्टरों को दिखाने के लिए बैठे रहे।
विज्ञापन
3 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब 12.30 बजे जनरल मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी, डरमोटोलॉजी सहित कुछ ऐसे विभाग रहे, जहां सन्नाटा रहा और ओपीडी का गेट बंद रहा। जिस ओपीडी के हाल में सामान्य दिनों में कुर्सियां भरी रहती हैं, वहां भी सोमवार को आधे से अधिक कुर्सियां खाली रही। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके माथुर का कहना है कि सीनियर डॉक्टरों ने निर्धारित संख्या के हिसाब से मरीजों को देखा।
4 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
ओपीडी शुरू होने के कुछ समय बाद आए रेजिडेंटों ने वरिष्ठों को जबरन ओपीडी से बाहर जाने के लिए उठा दिया। रेजिडेंट से हड़ताल खत्म करने की अपील की गई है। उधर रेजिडेंट का कहना है कि जब भी कोई घटना होती है तो अस्पताल प्रशासन केवल सुरक्षा का आश्वासन देता है, लेकिन घटनाएं नहीं रुक रहीं हैं। बीएचयू में हड़ताल की वजह से जिले के सरकारी अस्पतालों में दबाव अधिक रहा। मजबूरी में कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों का भी सहारा लेना पड़ा।
विज्ञापन
5 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार शाम को रेजिडेंट ने आईएमएस गेट से कैंडल मार्च निकाला। यहां से वह महिला महाविद्यालय चौराहा होते हुए सिंह द्वार पहुंचे। सिर पर पट्टी बांधकर मार्च में शामिल रेजिडेंट ने अस्पताल और पुलिस प्रशासन से ड्यूटी के दौरान रेजिडेंटों की पिटाई करने वाले दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा देने आदि की मांग की।
विज्ञापन
मरीज बोले, गलती किसी और की, हम भुगत रहे खामियाजा
6 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
बिहार के रामू मौर्या ने कहा कि सीने में कई दिनों से दर्द हो रहा था। गृह जनपद में दिखाया तो वहां चिकित्सकों ने बीएचयू रेफर कर दिया। समय से डॉक्टर को दिखा लेंगे, इस वजह से सुबह पर्चा काउंटर खुलने से पहले ही आ गए, लेकिन डॉक्टर को नहीं दिखा सके। पर्चा कटाने के बाद पता चला कि रेजिडेंट हड़ताल पर रहेंगे। गलती कोई और कर रहा है और खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
7 of 8
बीएचयू में डॉक्टर हड़ताल पर मरीज और तीमारदार परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
मऊ के अलाउद्दीन ने कहा कि छह साल के बच्चे को बुखार के साथ ही सांस लेने में तकलीफ थी। बीएचयू अस्पताल के बाल रोग विभाग में सुबह आ गए। पर्चा कटाने के बाद बेटे को लेकर ओपीडी के बाहर पहुंचा। यहां डॉक्टर नहीं मिले। कर्मचारियों ने हड़ताल का हवाला देते हुए वापस कर दिया और बाद में आने को कहा। मरीजों की समस्याओं के बारे में अस्पताल प्रशासन को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
बीएचयू अस्पताल में हड़ताल को लेकर रेजिडेंट की ओर से सभी विभागों को भेज गया पत्र।
- फोटो : अमर उजाला
काशी काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय के रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने का फायदा उठाते हुए परिसर में एक बार दलाल पुनः सक्रिय हो गए। मरीजों व उनके तीमारदारों को अपनी बातों में उलझा कर प्राइवेट अस्पताल में ले जाने में लगे रहे। वहीं कुछ दलालों से मरीजों व उनके तीमारदारों की नोकझोंक भी हुई उसके बाद वह चलते बने।