रामपुर। लोकसभा उपचुनाव में आधी आबादी भी पूरी जिम्मेदारी निभाएगी। जिले में कुल मतदाताओं में 46.84 फीसदी महिला मतदाता हैं, जो किसी भी तरह से सियासी बाजी पलटने की ताकत रखती हैं। ऐसे में किसी भी प्रत्याशी के लिए महिला मतदाताओं की अनदेखी भारी साबित हो सकती है।
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद रामपुर लोकसभा सीट रिक्त हो गई थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव का एलान कर दिया। जिले में सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं। भाजपा ने पूर्व एमएलसी घनश्याम सिंह लोधी पर दांव खेला है, तो सपा ने आजम खां के करीबी आसिम राजा को प्रत्याशी बनाया है। खुद आजम खां ने आसिम राजा के नाम का एलान किया था। जबकि, कांग्रेस और बसपा उपचुनाव से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में सियासी दलों की ओर से मतदाताओं को साधना शुरूकर दिया है। जनसभाओं का दौर शुरूहो गया है। गांव-गांव घूम रहे नेताओं का पूरा ध्यान महिला मतदाताओं की ओर है। हर कोई लुभावनी बातें कर महिलाओं को अपने पक्ष में करने पर लगा हुआ है। ऐसा हो भी क्यों न, क्योंकि महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में जो हैं। जिले में कुल मतदाताओं की तादाद 17.04 लाख है, जिसमें 46.84 फीसदी तो महिला मतदाता ही हैं। सीधे तौर पर कहा जाए तो 798584 महिला मतदाता किसी भी तरह से चुनावी बाजी पलट सकती हैं। लिहाजा, इन मतदाताओं को रिझाना नेताओं की पहली प्राथमिकता है।