मुंबई से भागे अंडरवर्ल्ड के बदमाशों को पकडने के लिए मैसेज पास होने और फोटो भेजे जाने के बाद भी यूपी पुलिस गच्चा खा गई। साफ जाहिर हो रहा है कि पुलिस का नेटवर्क कमजोर हो गया है। इसी के कारण पुलिस को मात खानी पड़ रही है।
मुखबिर के सहारे नेटवर्क बनाने वाली पुलिस के कुछ कर्मी खुद शातिरों के मुखबिर नजर आ रहे हैं। पशु तस्करों के मामले में भी पुलिस की दबिश से पहले ही तस्करों तक सूचना पहुंच जाती है और वो फरार हो जाते हैं।
मंगलवार की शाम मुंबई के पुलिस कमिश्नर ने एसपी को अंडरवर्ल्ड के दो बदमाशों के भागने की सूचना दी थी। एसपी ने नेटवर्क फैलाया। सघन चेकिंग कराई और अंडरवर्ल्ड के बदमाश रामपुर आने से पहले ही रोडवेज बस से मुरादाबाद में उतर गए और उत्तराखंड की ओर फरार हो गए। पुलिस हाथ मलते रह गई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस के भीतर पनप रहे किसी भेदिए ने अंडरवर्ल्ड के बदमाशों तक सूचना भेज दी गई होगी और वह रामपुर आने से पहले ही मुरादाबाद में उतर भागे।
सिस्टम के भीतर के भेदिए पुलिस के लिए घातक बन रहे हैं। क्योंकि जो पुलिस पहले रुपये देकर मुखबिरों को पालती थी, वही काम अब अपराध जगत से जुड़े लोग पुलिस में अपने भेदिये पैदा करने के लिए कर रहे हैं। पुलिस अधिकारी पशु तस्करों के यहां दबिश की गोपनीय योजना बनाते हैं, तो पहले ही तस्करों तक पहुंच जाती है और वे फरार हो जाते हैं।
रामपुर पुलिस में ऐसे भेदियों की संख्या कम नहीं है। पुलिस पर जितने भी हमले हुए हैं, उनमें पुलिस एक भी आरोपी को नहीं पकड़ सकी है। यही सबसे बड़ा कारण है।