रामपुर। ओमिक्रॉन वैरिएंट के बीच फरवरी माह में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में बेड की कमी सामने आई थी। हालांकि दूसरी लहर और इसके बाद जिले में बेड की उपलब्धता जिले में बढ़ गई है लेकिन, अगर तीसरी लहर भी दूसरी लहर की तरह घातक हुई तो बेड की कमी चुनौती बन सकती है।
कोरोना की दूसरी लहर ने पहली लहर की तुलना में अधिक कहर बरपाया था। पहली लहर में जिले में जहां अप्रैल माह से जुलाई माह के अंत तक चार माह में कुल 999 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए थे तो दूसरी लहर में अप्रैल और मई सिर्फ दो माह में ही करीब 6000 से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए। दूसरी लहर में करीब 16 दिन नए संक्रमित सौ से लेकर चार सौ से अधिक तक आए। मई माह में एक दिन में सर्वाधिक 421 नए मामले भी सामने आए। यानि पहली लहर में जितने संक्रमित चार माह में पाए गए उसके करीब आधे मामले दूसरी लहर में एक ही दिन में सामने आ गए थे। वहीं पहली लहर में जहां 52 संक्रमितों की मौत पोर्टल पर अपलोड हुई थी तो दूसरी लहर में 96 संक्रमितों की मौत पोर्टल पर अपलोड हुईं। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर कितनी अधिक घातक रही।
ऐसे में दूसरी लहर में अस्पतालों तक में बेड की किल्लत हो गई थी। सभी संक्रमितों को बेड मिल सके इसके लिए जिला अस्पताल और जौहर विवि के साथ ही बिलासपुर क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में अस्थायी कोविड अस्पताल बनाते हुए मरीज भर्ती किए गए। हालांकि रामपुर में अधिकतर मरीज होम आइसोलेशन में ही रहे, जिस कारण बेड की किल्लत अधिक नहीं हुई लेकिन, इस बीच आसपास के जनपदों में बेड कम पड़ने पर वहां के मरीज रामपुर में आकर भर्ती होने लगे, जिससे बेड बढ़ाने पड़े।
हालांकि कोरोना की दो लहरों के बाद मौजूदा समय में जिले में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक करीब 360 बेड की उपलब्धता है। ऐसे में अगर तीसरी लहर की घातकता दूसरी लहर के समान या उससे अधिक होती है तो ये बेड कम पड़ सकते हैं।