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योगी जी! रामपुर की चीनी मिल तो बिना बिके ही हो गई ‘नीलाम’

Sun, 09 Apr 2017 12:36 AM IST
मोहित सक्सेना/ रामपुर
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रामपुर मे बेहाल हालत मे बंद पड़ी चीनी मिल।
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18 साल पहले बंद हुई रामपुर शुगर मिल बिना बिके ही अवैध कब्जे में है। करोड़ों रुपये की संपत्ति वीरान भी पड़ी है। अफसरों की सांठगांठ से चीनी मिल की संपत्ति पर कब्जे होते रहे। सरकारी अमला सोता रहा। अब जब कब्जों को हटवाने की कोशिश हुई तो सरकारी अमला हाथ पर हाथ रखे बैठा रहा। यहां पर अभी भी कई रसूखदारों का अवैध कब्जा है। कब्जे कराने के पीछे किसका हाथ है और इस पूरी घपलेबाजी को भी जनता के सामने आने की जरूरत है। यहां भी सीबीआई जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। 

उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की रामपुर इकाई किसी जमाने में प्रदेश में ही नहीं देश भर की चीनी मिलों में सबसे बड़ी अहमियत रखती थी। 1932 में नवाब रजा अली खां के नाम से शुगर मिल स्थापित की गई थी। इस शुगर मिल के खुलने के बाद करीब डेढ़ हजार से ज्यादा लोगो की रोजी रोटी चल रही थी। करीब 67 साल तक रामपुर की चीनी की महक देश विदेश तक फैलती रही लेकिन नवंबर 1999 में घाटे की वजह से इस मिल पर ताले लग गए। करीब 127 हेक्टेयर जमीन पर स्थित उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की रामपुर इकाई के बंद होने के बाद से ही करोड़ों रुपये की संपत्ति पर भी अवैध कब्जे शुरू हो गए।  
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चीनी मिल के बंद होने के बाद यहां डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों की रोजी रोटी तो छिन ही गई साथ ही तमाम संपत्ति पर करोड़ों रुपये का कब्जा भी कर लिया गया।  निगम की 41 हेक्टेयर जमीन शुगर मिल से लेकर नई जिला कारागार को आवंटित कर दी गई ,लेकिन 86 हेक्टेयर जमीन पर अभी भी अवैध कब्जे हैं। 
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रामपुर शुगर मिल की करोड़ों की जमीन तो रामपुर में बिना बिके ही अवैध कब्जे में है। चीनी मिल की संपत्ति पर बने करीब डेढ़ सौ मकानों पर अवैध कब्जे हैं। इसके अलावा जिला कारागार की जमीन पर भी 250 मकानों पर अवैध कब्जे हैं। इसके अलावा स्वार, खौद व अजीमनगर की जमीन पर भी अवैध कब्जे हो चुके हैं। जमीन पर अवैध कब्जे किसने कराए और इन कब्जे करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। इसकी पूरी पड़ताल की जरूरत है। योगी सरकार यदि इस पर ध्यान दे और इसके भी घपलों की जांच कराए तो तमाम सफेदपोश बेनकाब हो सकते हैं।
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