महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की धूमधाम से शोभायात्रा निकाली। इसका उद्घाटन विधिवत रूप से एसडीएम ने किया। शोभायात्रा में काली का अखाड़ा आकर्षण का केंद्र रहा।
मंगलवार को नगर के मोहल्ला खास स्वार स्थित वाल्मीकि बस्ती से दोपहर 3 बजे भावाधस के कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में वाल्मीकि शोभायात्रा निकाली गई। इसका शुभारंभ एसडीएम गजेंद्र कुमार ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर वाल्मीकि समाज द्वारा एसडीएम को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसडीएम गजेंद्र कुमार ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि किसी एक जाति धर्म के नहीं अपितु सभी मानव जाति के लिये पूजनीय है। उनके द्वारा रचित रामायण विश्व धरोहर है जो मानव जाति को प्रेम, भाई चारा सद्भावना की प्रेरणा देती है।
भावाधस के प्रदेश महामंत्री दीप सिंह राही ने वाल्मीकि समाज से आह्रवान किया कि वह वाल्मीकि जी के बताए मार्ग पर चलकर अपने बच्चाें को अधिक से अधिक शिक्षा ग्रहण कराए। बाद में शोभायात्रा बड़ा शिवमंदिर से होती हुई मेनमार्केट, कोतवाली रोड़, स्वार रामपुर मार्ग होती हुई साप्ताहिक बाजार स्थित वाल्मीकि बस्ती में जाकर समाप्त हुई। शोभा यात्रा में वाल्मीकि जी का डोला मंदिर, महार्षि वाल्मीकि कमल के फूल से प्रकट होते, लवकुश को झूला झुलाती सीता- माता, तीरों की शैय्या पर भीष्म पितामह, पर्वत पर बैठे शंकर भगवान, कृष्ण की बांसुरी पर बैठी सरस्वती, हनुमान को बंाधते लवकुश, नृत्य करते भगवान शंकर पार्वती की झांकियां और काली मां के अखाड़े ने लोगों का मन मोह लिया।
शोभायात्रा का जगह- जगह संगठनाें ने स्वागत किया। शोभायात्रा में कोतवाल हरीश चंद्र जोशी, स्थानीय अभिसूचना इकाई प्रभारी महेश चंद्र शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैलाश एकलव्य, राजेश वाल्मीकि, सुनील, संजय राज, परवेश सिंहानिया, राजेश चौधरी, सरन लाल, प्रमोद, विनोद लाला, फिरोज भारती, छोटे लाल, बृजेश, लाजर, महेंद्र, सर्वेश, परवेश, बाबू राम, विनोद, सुरेश, मुकेश, आंनद भारती, सुनील, आशा, मिथलेश आदि मौजूद थे