पंद्रह दिन से चल रहा था विवाद
प्रशासन ने 15 दिन पहले ग्राम समाज की जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया था। इसके बाद से वहां एक पक्ष ने डॉ. आंबेडकर की मूर्ति लगाने का इरादा बनाते हुए सुगबुगाहट शुरू कर दी थी। पहले वहां आंबेडकर पार्क लिखा पोस्टर लगाया था। इसका दूसरे पक्ष के लोग विरोध कर रहे थे।
मंगलवार शाम को आंबेडकर पार्क का बोर्ड लगाए जाने पर दोनों पक्ष आमने सामने आ गए। ग्रामीणों का मानना है कि 15 दिन से भीतरी तौर पर चल रहीं दोनों पक्षों की गतिविधियों और मंशा को भांपकर सरकारी मशीनरी ने सख्ती से निर्णय लिया होता तो यह नौबत नहीं आती।
घर का बड़ा बेटा था सुमेश
दिन में हाईस्कूल का पेपर देकर आया सुमेश शाम को गांव में हंगामा होने पर घर से निकल आया था। वह मौके पर लोगों की भीड़ में खड़ा हो गया था। इस बीच फायरिंग शुरू हो जाने से एक गोली उसे जा लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वह घर का बड़ा बेटा था। उसकी जान जाने से बहनों के आंसू थम नहीं पा रहे हैं।
ग्रामीण बोले, मकान की खिड़की से शुरू की गई थी फायरिंग
ग्रामीणों का कहना है कि विवाद वाले स्थान के पास में मकान की खिड़की से फायरिंग शुरू की गई थी। ग्रामीणों ने दो पुलिस कर्मियों पर फायरिंग का आरोप लगाया है। ऐसा आरोप लगाने वालों को एसपी ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।