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Rampur seat: रामपुर सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला, भाजपा-सपा में सीधी टक्कर के आसार, आजम फैक्टर का दिखा असर

Sat, 20 Apr 2024 11:43 AM IST
विमल शर्मा वाहिद अली,रामपुर

सार

रामपुर सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं। इस सीट पर कम मतदान होने से कांटे की मुकाबले की संभावना बढ़ गई है। जिले के पांचों विधानसभा सीटों के ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं ने ज्यादा रुचि दिखाई। वोटों के ध्रुवीकरण से भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार नजर आ रहे हैं। बसपा ने अपने परंपरागत दलित वोट लेने में कामयाबी हासिल की है। 
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रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पहले चरण के लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट पर प्रदेश भर की नजरें टिकी थीं। ऐसे में कम मतदान प्रतिशत ने सभी को चौंकाया जरूर है, लेकिन अब कांटे के मुकाबले की संभावना भी बढ़ गई है। रामपुर लोकसभा सीट के लिए जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने खूब रुचि दिखाई। शहर विधानसभा सीट पर सबसे कम 44.87 प्रतिशत और स्वार सीट पर सबसे ज्यादा 60.43 प्रतिशत मतदान रहा, जबकि बिलासपुर, चमरौआ, मिलक में 55 प्रतिशत से ऊपर मतदान रहा है।

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सभी विधानसभाओं में वोटों के ध्रुवीकरण से भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार नजर आ रहे हैं। बसपा ने अपने परंपरागत दलित वोट लेने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन उसमें भाजपा ने भी सेंधमारी की है। कुछ दलित मतदाता साइकिल पर भी सवार हुए हैं। ऐसे में रामपुर सीट का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।

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रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद
स्वार विधानसभा क्षेत्र (60.43) 
स्वार विधानसभा सीट पर 3,11,390 में से 1,88,170 मत पड़े हैं। यहां अल्पसख्यंकों ने साइकिल की खूब सवारी की। इस सीट पर अंसारी और अन्य मतदाताओं ने साइकिल की रफ्तार को बढ़ाया। हालांकि, अपना दल के विधायक शफीक अंसारी के प्रभाव से अल्पसंख्यकों ने कमल भी खिलाया। वहीं पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं ने कमल में दिलचस्पी दिखाई। दलित मतदाताओं ने बसपा के साथ भाजपा का भी साथ दिया। 

रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद

चमरौवा विधानसभा क्षेत्र (57.89)
चमरौवा विधानसभा सीट पर 3,13,463 में से 1,81,459 मत पड़े हैं। यहां करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता हैं। चमरौवा में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने साइकिल की रफ्तार को बढ़ाया तो वहीं पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं ने कमल खिलाया। यहां बसपा का भी असर दिखा।

रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद

शहर सीट पर दिखा आजम फैक्टर का बड़ा असर  

शहर विधानसभा क्षेत्र (44.87) : रामपुर की शहर विधानसभा सीट पर 3,91,993 में से केवल 1,75,893 ने मतदाताओं ने मतदान किया। जिसमें मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है, ऐसे में आजम खां और उनके करीबी के चुनाव में न आने का फैक्टर नजर आया। मतदान प्रतिशत कम रहा, लेकिन शहर सीट पर साइकिल पर ही अल्पसंख्यक मतदाताओं ने सवारी की। बसपा के हाथी में भी रुचि दिखाई। कम मतदान का लाभ यहां भाजपा को मिलेगा, जिससे इस सीट पर साइकिल और भाजपा में कांटे का मुकाबला होगा। यहां लोधी और अन्य जातियों के मतदाताओं ने कमल खिलाया है। 

रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद

बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र (59.35) 
बिलासपुर विधानसभा सीट पर 3,52,911 में से 2,09,454 मत पड़े हैं। यहां मुस्लिम आबादी मात्र 30 प्रतिशत है, जबकि 60 से 70 प्रतिशत सिख समाज के मतदाता हैं। यहां अधिकतर सिख मतदाताओं ने कमल खिलाया है। तो 10 से 20 प्रतिशत सिख समाज के मतदाताओं ने साइकिल की सवारी की है। अल्पसंख्यकों में भी साइकिल का असर ज्यादा दिखा। भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली बिलासपुर में भाजपा को साइकिल से कड़ी टक्कर मिल सकती है।

रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद

मिलक विधानसभा क्षेत्र (58.14)
मिलक विधानसभा सीट पर 3,62,089 में से 2,10,528 मत पड़े हैं। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले मिलक में कमल खूब खिला। वहीं बसपा के परंपरागत दलित वोट बैंक ने हाथी की सवारी की। सिलईबड़ा कांड के बाद इस सीट पर दलित मतदाता नाराज थे, जिसके चलते वो हाथी पर सवार हुए। तमाम दलित मतदाताओं ने कमल भी खिलाया। इस सीट पर मुस्लिमों ने साइकिल की रफ्तार को बरकरार रखा।

रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद
शहर में 2.16 लाख मतदाताओं ने नहीं डाले वोट 
रामपुर शहर सीट में 391993 मतदाताओं में से केवल 175893 मतदाताओं ने ही मत का इस्तेमाल किया। इस तरह करीब 216100 मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल नहीं किया। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में 52.6 फीसदी मतदाताओं ने शहर विधानसभा सीट पर अपने मत का इस्तेमाल किया था।
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रामपुर में मतदान - फोटो : संवाद
शहर से लेकर गांव तक नहीं दिखे सपा के बस्ते
शहर से लेकर गांव तक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के बस्ते तक नहीं दिखे। बूथों पर सपा के एजेंट भी कम दिखे। सपा प्रत्याशी समर्थकों के साथ ही टहलते हुए नजर आए। उनके साथ पार्टी का पदाधिकारी न तो पूरे चुनाव में नजर आया और न ही मतदान के दिन। सपा नेता आजम खां की टीम द्वारा दूरी बना लेने की वजह से शहर के बूथों के आसपास लगने वाले बस्ते तक ननजर नहीं आए। उनके एजेंट भी कहीं नजर नहीं आ रहे थे।
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