रामपुर। जेल के बंदी/कैदी अन्य लोगों के घरों में रोशनी कर रहे हैं। अपराध की दुनिया से जुड़ने के कारण जेल तक पहुंचे इन बंदियों/कैदियों के जीवन में भले ही जेल की चाहरदीवारी के बाहर की रोशनी नसीब न हो लेकिन, इनके हाथों का हुनर लोगों के घरों को रोशन कर रहा है।
जेल में इन दिनों बंदियों/कैदियों द्वारा एलईडी बल्ब बनाए जा रहे हैं। इसके लिए बंदियों/कैदियों को प्रशिक्षण दिया गया था। करीब छह माह पूर्व प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत इन बंदियों/कैदियों को एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। जिसमें बैँक ऑफ बड़ौदा के द्वारा भी सहयोग किया गया था। प्रशिक्षण के दौरान तीस बंदियों/कैदियों को एलईडी बल्ब बनाना सिखाया गया था। इसके बाद अब मौजूदा समय में दस बंदी/कैदी एलईडी बल्ब बना रहे हैं। रोजाना औसतन डेढ़ सौ एलईडी बल्ब इनके द्वारा बनाए जाते हैं। जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने बताया कि एलईडी बल्ब बनाने के लिए बंदियों व कैदियों को प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद अब दस बंदी/कैदी एलईडी बल्ब बना रहे हैं। एलईडी बल्ब बनाने के लिए कच्चा माल एक कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया जाता है और यही कंपनी तैयार किए गए एलईडी बल्ब ले जाती है। एलईडी बल्ब बनाने के लिए बंदी/कैदी को एक रुपया प्रति बल्ब भुगतान किया जाता है।