रामपुर। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर न तो बिजली और न ही पानी का इंतजाम है। 2700 में से करीब साढ़े पांच सौ केंद्रों पर ही बच्चों को मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। ऐसे में केंद्रों पर आने वाले बच्चे गर्मी में ही बैठने को मजबूर रहते हैं। इसके अलावा तमाम केंद्रों पर तो पानी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चों को परिषदीय स्कूल या आसपास की आबादी में लगे नलों के सहारे ही रहना पड़ता है।
सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी की तर्ज पर संचालित करने की योजना है। इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। लिहाजा, अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को शिक्षा भी दी जाएगी। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधी से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षित हो चुकी हैं, जबकि बाकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, कविताएं, गिनती आदि सिखा सकेंगी।
किन्तु, रामपुर की बात की जाए तो अधिकांश केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं का ही अभाव है। जिले में 2700 आंगनबाड़ी केंद्रों में से करीब साढ़े पांच सौ आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही बिजली-पानी का इंतजाम है, जबकि बाकी केंद्र ऐसे ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बिजली-पानी का इंतजाम न होने की वजह से बच्चों को गर्मी में ऐसे ही केंद्रों पर बैठना पड़ता है। यदि बच्चों को पानी पीना हो, तो उसके लिए भी बच्चे आसपास के किसी घर या फिर परिषदीय स्कूल में लगे हैंडपंप के सहारे रहते हैं। ऐसे में सरकार को निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों की बराबरी करने के लिए सुविधाओं और संसाधनों पर थोड़ा जोर देना होगा, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार हो सके।