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मानसिक संतुलन बिगड़ने की वजह से सामने आती हैं आत्महत्या की घटनाएं: डॉ. चौहान

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रामपुर। आत्महत्या के ज्यदातर मामले मेंटल डिसऑर्डर की वजह से होते हैं, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज करते रहते है। इसके अतिरिक्त नशे के आदी लोग भावावेश में ज्यादा शराब पीने या नशे के शिकार होने के कारण भी आत्महत्या कर लेते हैं। यह बात आयुर्जीवनम पैरा मेडिकल कॉलेज में आयोजित आत्महर्ग रोकथाम एवं मानसिक तनाव नियंत्रण परामर्श गोष्ठी में मनोचिकित्सक कुलदीप सिंह चौहान ने कही।
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उन्होंने कहा कि कुछ आत्महत्या इंसान की बेकाबू भावनाएं जिम्मेदार के कारण होती हैं। कई बार लोग खास तौर पर युवा स्ट्रेस, आर्थिक समस्याओं, रिलेशनशिप की समस्याओं जैसे ब्रेकअप या प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड जैसे कदमों को उठा लेते हैं। सुसाइड का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है उन्होंने पहले कभी खुदकुशी की कोशिश की हो। डॉ. चौहान ने सुसाइड रोकने का सबसे कारगर उपाय के बारे में कहा कि मित्रों एवं रिश्तेदारों को ऐसे व्यक्ति पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है जो आत्महत्या की बाते अधिकतर समय करता हो। जो हर बात में नकारात्मक विचार रखता हो। जो एकाएक गुमसुम रहता हो या जिसने कभी आत्महत्या का प्रयास किया हो।
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