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1930 में बनकर हुई थी तैयार: काफी खास है खासबाग पैलेस, दावा देश की पहली वातानुकूलित कोठी होने का

Thu, 09 Dec 2021 02:09 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर

सार

खासबाग पैलेस में स्थित स्ट्रांग रूम को खोलने में सर्वे व मूल्यांकन टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्ट्रांग रूम 1980 से बंद पड़ा था। स्ट्रांग रूम का निर्माण लंदन की प्रसिद्ध चब कंपनी द्वारा किया गया था। स्ट्रांग रूम की चाबियां गुम हो जाने के कारण इसे तोड़ना मजबूरी थी। 
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खासबाग पैलेस - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साल 1930 में बनकर तैयार हुई कोठी खासबाग रामपुर रियासत के अंतिम शासकों की अचल संपत्ति में सबसे महत्वपूर्ण व कीमती है। कोठी खासबाग के बारे में दावा किया जाता है कि देश की पहली वातानुकूलित कोठी है। यूरोपीय-इस्लामी शैली में बनी यह कोठी बेहद खूबसूरत है। इसमें करीब 200 कमरे और कई बडे़ हॉल हैं। इनमें नवाब का ऑफिस, सिनेमाहॉल, संगीत हॉल, स्वीमिंग पूल भी है। सिविल लाइंस क्षेत्र में बनी इस कोठी के चारों ओर बाग है, जिसमें एक लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए थे। कोठी में बेशकीमती पेंटिंग लगी हैं। इनकी कीमत ही 23 करोड़ आंकी गई है।

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शस्त्रागार में कई देशों के हथियार मिले थे
संपत्ति के मूल्यांकन के दौरान जब शस्त्रागार खोला गया तो वहां आलमारियों में हजारों की संख्या में हथियार पाए गए थे। इनमें स्कॉटलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन, हालैंड, अमेरिका आदि की बनी पिस्टल, बंदूकें, रायफल व रिवाल्वर शामिल थे। हजारों की संख्या में मिले इन हथियारों में खंजर, भाले, तलवारें व नेजे भी शामिल थे। इनकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। संवाद

लंबी बंदूक म्यूजियम के लिए की गई थी प्रस्तावित
संपत्ति बंटवारे की प्रस्तावित विभाजन योजना में नवाब की एक लंबी बंदूक को म्यूजियम के लिए प्रस्तावित किया गया था। वहीं रामपुर रियासतकाल के हथियारों में से करीब एक दर्जन प्रकार हथियार प्रयोग में न आने और रखरखाव न हो पाने के कारण खराब हो गए हैं। इन हथियारों की अनुमानित कीमत को प्रस्तावित विभाजन योजना में निल दर्शाया गया था। संवाद
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वेल्डिंग मशीन की मदद से काटा गया था स्ट्रांग रूम
खासबाग पैलेस में स्थित स्ट्रांग रूम को खोलने में सर्वे व मूल्यांकन टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। स्ट्रांग रूम 1980 से बंद पड़ा था। स्ट्रांग रूम का निर्माण लंदन की प्रसिद्ध चब कंपनी द्वारा किया गया था। स्ट्रांग रूम की चाबियां गुम हो जाने के कारण इसे तोड़ना मजबूरी थी। करीब दो सप्ताह तक तोड़ने में कामयाबी न मिलने पर गैस वेल्डिंग कटर मशीन से काटने का प्रयास हुआ था। कई घंटे बाद भी गैस कटर स्ट्रांग रूम की दीवार को कुल 16 मिलीमीटर ही काट सका था। लगातार कोशिश करने पर सातवीं बार में खोलने में कामयाबी मिल सकी थी। हालांकि स्ट्रांग रूम की कुछ तिजोरियों में ही थोड़ा-बहुत सामान मिला। ज्यादा तिजोरियां खाली ही मिली थीं।

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