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कार्तिक पूर्णिमा: कोसी नदी में स्नान की परंपरा का निर्वाहन न कर सके श्रद्घालु

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रामपुर। भले ही जिला पंचायत ने बाढ़ के कारण रास्ता खराब होने से कोसी नदी के तट पर लगने वाले मेले को न लगाने का निर्णय लिया। लेकिन, कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था के सैलाब को नहीं रोका जा सका। जब श्रद्धालु कोसी नदी के तट पर पहुंचने में असफल रहे तो उन्होंने स्वर्गधाम के पास रास्ते में ही बाढ़ से बनी अस्थाई झील में दीपदान किया। झील के किनारे पर बैठकर बच्चों के मुंडन कराए और भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी। अधिकांश श्रद्धालुओं ने घरों पर आकर स्नान कर परंपरा का निर्वहन किया। वहीं, कुछ लोग कोसी नदी के पुल के किनारे नदी तक पहुंच गए।
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कोसी नदी में पिछले दिनों आई बाढ़ से जिलेभर में तबाही मचाई थी। रामपुर शहर के आसपास नदी की तरफ जाने वाले रास्तों में कई-कई फीट पानी भर गया था। जिससे नदी की ओर जाने वाले रास्ते बंद पड़े हैं। जिसके चलते जिला पंचायत ने कार्तिक पूर्णिमा पर कोसी नदी के घाट पर मेला न लगाने का निर्णय लिया था लेकिन, इसके बावजूद शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ कोसी नदी की तरफ जाना शुुरू हो गई थी। लेकिन, स्वर्गधाम से आए कोसी नदी तक जाने का कोई रास्ता न होने और पूरे जंगल में बाढ़ का पानी भरा होने से कोसी नदी में स्नान कर नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान करने वाले तमाम श्रद्धालु मायूस हो गए। श्रद्धालुओं ने स्वर्गधाम के पास बाढ़ के कारण बनी अस्थाई झील के पानी में अपने पूर्वजों की याद में दीपदान किया। बच्चों का मुंडन कराकर झील के पानी में पसरी पड़ी गंदगी में उन्होंने बच्चों के मुंह हाथ धुलाए। कुुछ श्रद्धालुओं ने अस्थाई झील में ही स्नान कर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने की परंपरा का निर्वहन किया। श्रद्धालुओं ने झील के किनारे ही भगवान सत्यनारायण की कथा कराई और गरीबों को दान दिया। अधिकांश श्रद्धालु वहां की स्थिति देखकर बगैर स्नान करे ही अपने घरों को वापस लौट गए।
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