रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय के गेट प्रकरण में सोमवार को सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने पूर्व में एसडीएम कोर्ट द्वारा गेट हटाए जाने के आदेश को यथावत रखा है। हालांकि कोर्ट ने क्षतिपूर्ति व जुर्माने की धनराशि में बदलाव कर दिया है।
साल 2019 में एसडीएम सदर की कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर जौहर यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट हटाने के आदेश दिए थे। आरोप था कि यूनिवर्सिटी के अंदर जो सड़क मौजूद हैं, वे लोक निर्माण विभाग की हैं, जिसे गेट लगाकर बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही जुर्माने के आदेश भी दिए गए थे। इस मामले में आजम खां की ओर से एसडीएम कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने आजम खां की याचिका खारिज कर दी थी और साथ ही उनको जिला जज की कोर्ट में अपील दायर करने को कहा था। इसके बाद रामपुर सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई थी। कोर्ट में 20 जुलाई को पिछली सुनवाई के दौरान बहस की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी थी। इस मामले में सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट ने पूर्व में एसडीएम कोर्ट द्वारा दिए गए गेट को हटाए जाने के आदेशों को यथावत रखा है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने बताया कि मामले में कोर्ट ने क्षतिपूर्ति एवं जुर्माने की धनराशि में भी बदलाव किया है। कोर्ट ने अब जून 2016 से मई 2019 तक की अवधि की क्षतिपूर्ति की धनराशि एक करोड़ 63 लाख 80 हजार रुपये निर्धारित की है। साथ ही कब्जा न हटाने पर अब कब्जा हटाने तक की अवधि पर 4 लाख 55 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से जुर्माना देना होगा।