टीबी के मरीज खोजिए और पांच सौ रुपये लीजिए
आयुष चिकित्सकाें के लिए शासन की ओर से लागू की गई योजना
रामपुर। जिले को टीबी से मुक्त करने के लिए अब आयुष चिकित्सकों की मदद ली जाएगी। इसके लिए उनका डाटा जुटाया जा रहा है। आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सकों को उनके पास आने वाले टीबी के मरीजों को क्षयरोग अस्पताल रेफर करना होगा। उन्हें इन मरीजों की जानकारी निक्षय पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इसके लिए आयुष चिकित्सकों को पांच सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। अभी जिलेभर में टीबी रोगियों की संख्या 2676 है, जिनका उपचार चल रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि निजी होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सकों के लिए शासन ने एक नई योजना शुरू की है। हर तरह के मरीज इन चिकित्सकों के यहां आते हैं। लक्षणों को देखकर अगर उन्हें लगता है कि उस व्यक्ति को क्षय रोग हो सकता है, तो वह ऐसे मरीजों को क्षय रोग विभाग को रेफर करेंगे। क्षय रोग विभाग उस व्यक्ति की जांच कराएगा और क्षय रोगी की पुष्टि होती है तो उस चिकित्सक को पांच सौ रुपये प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा। इसके लिए निजी होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सकों की सूची तैयार की जा रही है, जिसके बाद निजी क्षेत्र के आयुर्वेदिक होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सकों को टीबी मरीजों की सूचना निक्षय पोर्टल पर दर्ज करानी होगी, ताकि मरीज की जरूरी इलाज के साथ निगरानी की जा सके।
टीबी के लक्षण
- भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
- बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।
- हल्का बुखार रहना।
- खांसी आती रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना।
- कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
- गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना
- गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि
टीबी मरीजों के लिए सलाह
- टीबी की दवा नियमित रूप से लें।
- स्वस्थ व्यक्ति के ज्यादा करीब जाने से बचें।
- छींकते-खांसते वक्त मुंह पर रुमाल जरूर रखें।
- पौष्टिक और संतुलित आहार लें।
- स्वच्छता का विशेष खयाल रखें।
बचाव के तरीके
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- दवा का पूरा कोर्स लें।
- मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहे। साथ ही एसी से परहेज करें।
- पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज और योग करें।
- बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
- भीड़भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
- बच्चे के जन्म पर बीसीजी का टीका लगवाएं।
कितना बदला टीबी का उपचार
रामपुर। टीबी का उपचार चार साल में काफी बदल गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के प्रयास में टीबी का उपचार बदल गया है। पिछले सालों की बात करें तो टीबी का उपचार केबल बलगम की जांच से होता था, लेकिन अब विभाग ने एक एप का प्रयोग किया। इसकी मदद से टीबी के मरीज खोज सकते हैं। इसके साथ ही टीबी के इलाज के लिए रोगियों को गोद दिलाकर नियमित रूप से उपचार किया जा रहा है। मरीजों की गूगल मैप पर लोकेशन दर्ज, टीबी आरोग्य साथी एप से इलाज की जानकारी, दस्तक अभियान चलाकर जागरूक और मरीजों की देखभाल, मरीज बताने पर धनराशि जैसे प्रयासों से मरीज खोजने में आसानी हुई। मरीजों को नियमित देखभाल के साथ उपचार दिया गया। इसके साथ ही क्षय रोग से संक्रमित बच्चों को टीबी रोग से बचाने के लिए टॉफी जैसे दवाएं दी जा रही हैं।
विभाग के पास ये हैं टीबी जांच के संसाधन
-माइकोस्कोप- 15
-सीवीनेट मशीन- 2
-टूनेट मशीन-16
एक नजर में
- मौजूदा समय में टीबी रोगियों की संख्या- 2676
- प्रतिमाह बलगम जांच की संख्या- औसतन दो हजार से अधिक
-अब निजी आयुष चिकित्सकों को क्षय रोगी को रेफर करना होगा। इसके लिए चिकित्सक को निक्षय एप पर सूचना दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही चिकित्सकों को प्रति केस के हिसाब से पांच सौ रुपये दिए जाएंगे। निजी आयुष चिकित्सकों को डाटा तैयार किया जा रहा है।
- डॉ. विनोद कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी