आनी उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित फागली उत्सव में लोग पुरानी परंपरा का दर्शाते हुए
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आनी (कुल्लू)। आनी के बुच्छैर में फागली उत्सव की धूम रही। क्षेत्र के पांच गांवों में मनाए जाने वाले इस उत्सव में शिरकत करने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। शनिवार को पारंपरिक तरीके से मेले का समापन हुआ। इस दौरान हजारों लोगों ने देवताओं के साथ पारंपरिक सवांग नृत्य और ढाई फेर नाटी डालकर परंपरा को निभाया।
आराध्य देवता काली नाग और हनमंत देवता के सानिध्य में फागली उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। उत्सव में देवता ने प्रमुख गांव लढागी से बुच्छैर, बनास, रूमाली, लफाली, बनास का दौरा किया। इस दौरान देव परंपरा के अनुसार ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर देवताओं की आराधना करते हुए ढाई फेर नाटी डाली। लोगों ने पारंपरिक घास के परिधान पहनकर सवांग नृत्य से सभी का मन मोहा।
देवता के कारदार बहादुर सिंह, गुलाब सिंह और रोशन लाल ने बताया कि क्षेत्र में फागली उत्सव मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे हर तीसरे वर्ष मनाया जाता है। क्षेत्र की खुशहाली के लिए यह उत्सव मनाया जाता है। क्षेत्र की फसलों के बीमारी की चपेट में आने पर लोग आराध्य देवताओं के दरबार में जाकर फरियाद लगाते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद देवता के आदेशों से उत्सव को मनाया जाता है।