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भारतीय पासपोर्ट से एक बार बांग्लादेश घूम आया था देवाशीष

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भारतीय पासपोर्ट से एक बार बांग्लादेश घूम आया था देवाशीष
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रामपुर। शाहबाद पुलिस की गिरफ्त में आए बांग्लादेशी देवाशीष ने फर्जी दस्तावेजों से बनवाए भारतीय पासपोर्ट की मदद से एक बार बांग्लादेश की यात्रा कर ली थी। 23 अक्तूबर को दोबारा बांग्लादेश जाते समय सीमा पर चेकिंग के दौरान शक होने पर उसका पासपोर्ट जांच के लिए बरेली भेजा गया था। जांच में उसका पासपोर्ट फर्जी कागजों से तैयार होने की बात सामने आने पर सोमवार को उसे गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उसके पास से फर्जी दस्तावेजों से तैयार कराए गए भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बरामद हुए।
अब तक की जांच में सामने आया है कि वह देवाशीष विश्वास के नाम से जारी बांग्लादेशी पासपोर्ट से साल 2012 में तीन माह के वीजा पर भारत आया था। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वह शाहबाद नगर में आकर रहने लगा था। यहां करीब पांच साल रहने के बाद वह बरेली जिले के सिरौली कस्बे में अपना मकान बनाकर रहने लगा। इस दौरान देवाशीष मंडल नाम से वह खुद को डॉक्टर प्रदर्शित करते हुए लोगों का इलाज करने लगा था।
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शाहबाद पुलिस की धर पकड़ के दौरान उसके पास से भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए, जिन्हें दस्तावेजों के कूटरचित तरीके से इस्तेमाल करके तैयार कराया गया था। खुद को भारतीय दर्शाते हुए स्थानीय पते का इस्तेमाल किया था।
देवाशीष की गिरफ्तारी के साथ जहां भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट तैयार करते समय आवेदक की जांच प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं इस बीच उसके बांग्लादेश की यात्रा कर लेने से सीमा पर होने वाली चेकिंग व्यवस्था भी सवालिया घेरे में आ रही है। सवाल उठ रहा है कि जिस तरह 23 अक्तूबर को सड़क मार्ग से बांग्लादेश जाते समय सीमा पर चेकिंग के दौरान उसका पासपोर्ट शक के दायरे में आने से इस मामले का राजफाश हुआ, वैसा उसकी बांग्लादेश की पूर्व यात्रा के समय क्यों नहीं हुआ। देवाशीष के साल 2016 में भारतीय पासपोर्ट से बांग्लादेश जाने और करीब दस दिन बाद भारत लौटने की जानकारी मिली है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्वाकीर किया है कि भारतीय पासपोर्ट बनने के बाद देवाशीष एक बार बांग्लादेश गया था, लेकिन वह कब और कितने दिन के लिए गया था, इसकी स्पष्ट जानकारी न होने की बात उन्होंने कही।
2025 तक है पासपोर्ट की वैधता
फर्जी दस्तावेजों की मदद से तैयार हुए देवाशीष के भारतीय पासपोर्ट की वैधता वर्ष 2025 तक है। उसने अक्तूबर 2015 में अपना भारतीय पासपोर्ट बनवाया था।
इमीग्रेशन और विदेश मंत्रालय को भेजी जाएगी देवाशीष की रिपोर्ट
बांग्लादेशी नागरिक देवाशीष की रिपोर्ट पुलिस तैयार कर रही है। यह रिपोर्ट इमीग्रेशन और विदेश मंत्रालय को भेजी जाएगी।
एसपी अंकित मित्तल ने बताया कि देवाशीष प्रकरण में रिपोर्ट सीओ द्वारा तैयार की जा रही है। सीओ द्वारा रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर इसे इमीग्रेशन और विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके बाद आगे की संबंधित कार्रवाई इमीग्रेशन और विदेश मंत्रालय द्वारा की जाएगी।
पुलिस ने देवाशीष के पासपोर्ट व अन्य दस्तावेजों की जांच के दौरान उसके परिजनों की भी जानकारी जुटाई थी। पुलिस जांच में देवाशीष के भारत आने के लिए प्रयोग किए गए वीजा के आधार पर उसके देवाशीष विश्वास के नाम से बांग्लादेशी पासपोर्ट की जानकारी भी मिली थी। इसमें उसका पता ग्राम वारी अली थाना व तहसील चौगासा जिला जसर, बांग्लादेश दर्ज था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार देवाशीष के फर्जी भारतीय दस्तावेजों पर भारत में रहने की जानकारी उसके परिजनों को इस वेरीफिकेशन के दौरान हो गई है।
देवाशीष प्रकरण में खुफिया तंत्र और पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि वह तीन माह के वीजा पर बांग्लादेश से कोलकाता आया था। इस दौरान उसे एक रिश्तेदार ने कोलकाता स्थित एक रिश्तेदार के पास भेजा था। देवाशीष के भारत आने से कुछ माह पहले बांग्लादेश में एक सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इसके बाद वह उसके कोलकाता आने की बात सामने आ रही है। इसके बाद वीजा अवधि समाप्त होने के बाद देवाशीष रामपुर आ गया था।
खुफिया तंत्र और पुलिस के रडार पर देवाशीष के करीबी और मददगार
रामपुर। फर्जी तरीके से बनवाए गए भारतीय दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक के मामले में उसके कई करीबी और मददगार पुलिस और खुफिया तंत्र की रडार पर आ गए हैं। पुलिस देवाशीष ने किन लोगों की मदद से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस तैयार कराए उन लोगों की कुंडली खंगाल रही है।
पुलिस और खुफिया तंत्र की कार्रवाई शुरू होने से जिले के कई बंगाली चिकित्सकों में हड़कंप मचा हुआ है कुछ तो भूमिगत भी हो गए हैं। एसपी अंकित मित्तल ने बताया कि देवाशीष के संपर्क में रहने वाले करीबी लोगों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और इनसे पूछताछ की जाएगी। कुछ लोगों को तलाश किया जा रहा है।
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जिले में 30 लोग शक के दायरे में
जिले में तीस बांग्ला भाषी लोग ऐसे हैं, जो कि खुफिया तंत्र की रडार पर हैं। इन लोगों की गोपनीय ढंग से निगरानी की जा रही है। खुफिया विभाग को शक है कि ये लोग बांग्लादेशी हो सकते हैं। देवाशीष प्रकरण के बाद इनमें से कुछ लोग गायब भी हो गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
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