रामपुर। सूबे में सुर्खियों में रह चुके रामपुर के कारतूस कांड में मंगलवार को गवाह के कोर्ट न आने के कारण जिरह नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने गवाह के जमानती वारंट जारी करते हुए मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख नौ नवंबर तय की है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2010 को लखनऊ एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ ज्वालानगर पुल के नीचे से पीएसी के सेवानिवृत्त दरोगा यशोदा नंदन को गिरफ्तार करते हुए कारतूस कांड का खुलासा किया था। एसटीएफ ने इस दौरान सीआरपीएफ के हवलदार विनोद और विनेश को भी गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और कारतूस बरामद किए थे।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही व उनसे पूछताछ के आधार पर मुरादाबाद पीटीसी में तैनात आरमोरर नाथीराम सैनी को भी गिरफ्तार किया था। यशोदा नंदन की निशानदेही पर इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, मऊ आदि जनपदों से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल शुरू हो गया। इस मामले की सुनवाई रामपुर एडीजे द्वितीय की कोर्ट में चल रही है। इसमें सभी आरोपी जमानत पर चल रहे हैं, जबकि मुख्य आरोपी यशोदा नंदन की मौत हो गई है।
मंगलवार को कोर्ट में इस मामले की सुनवाई निर्धारित थी, जिसमें गवाह मिथलेश झा की गवाही व जिरह होनी थी। गवाह के उपस्थित न होने के कारण कोर्ट ने मिथलेश झा के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी करते हुए सुनवाई के लिए अगली तारीख नौ नवंबर तय की है।