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बाढ़ से नुकसान के बाद दढ़ियाल में बिकने की कगार पर पहुंचे कोल्हू

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दढ़ियाल। बारिश और उसके बाद कोसी नदी में आई बाढ़ का असर दढ़ियाल के गुड़ कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। कोल्हू चलाने की तैयारी में लगे कई संचालक अब दढ़ियाल में अपना कोल्हू बंद करने अथवा बेचने की तैयारी में लगे हैं। उनका अनुमान है कि बारिश और बाढ़ से क्षेत्र में गन्ने की फसल नष्ट होने से दढ़ियाल में गुड़ उत्पादन करना घाटे का सौदा साबित होगा।
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गुड़ उत्पादन के लिए विख्यात दढ़ियाल में इस बार बारिश और बाढ़ ने गुड़ की मिठास फीकी कर दी है। पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा दढ़ियाल का गुड़ कारोबार अब बंदी की कगार पर है। बीस वर्ष पहले कभी कस्बे में सौ से अधिक कोल्हुओं में गुड़ उत्पादन किया जाता था।
लेकिन, इसके बाद क्षेत्र में त्रिवेणी चीनी मिल लगने और प्रदूषण एवं प्रशासनिक दुश्वारियों के चलते कस्बे में कोल्हुओं की संख्या निरंतर कम होती गई। रही सही कसर बारिश और बाढ़ ने पूरी कर दी। जिसके चलते कस्बे में इस बार मात्र 24 कोल्हू गुड़ बनाने के लिए तैयार हैं। कस्बा निवासी अकील, सद्दाम आदि ने अपने कोल्हू बेच दिए हैं। जबकि इस्लाम, नजी अहमद, मकसूद आदि कई संचालक अपने कोल्हुओं को दूसरे क्षेत्रों में ले गए हैं।
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कोल्हू संचालक मुस्तफा अहमद ने बताया कि तैयार कोल्हुओं में भी कुछ संचालक अपने कोल्हू बेचने की तैयारी में हैं। कोसी बांध के पास लगे पांच कोल्हू बाढ़ की चपेट में आने से कोल्हू संचालकों को लाखों का नुकसान हो चुका है, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
इसके अलावा कोल्हू संचालकों का मानना है कि दढ़ियाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश और उसके बाद कोसी नदी में आई बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे क्षेत्र में गन्ने के दाम महंगे रहने के आसार हैं। साथ ही खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से गन्ने में गुड़ की रिकवरी भी कम हो जाएगी।
-कोसी बांध के निकट उनके अलावा अजमत, इस्लाम, हमीदा, इकराम के कोल्हू हैं। बारिश के बाद बाढ़ की चपेट में आने से उनके कोल्हुओं में भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ में कोल्हू पर पड़ा एक लाख से अधिक का गन्ना और खोई खराब हो गई। भट्टी भी नष्ट हो गई हैं। आसपास दलदल है। दोबारा कोल्हू खड़ा करने में काफी लागत लगानी पड़ेगी। ऐसे में कोल्हू चलाना काफी मुश्किल है। -इकबाल, कोल्हू संचालक।
-पिछले वर्ष कस्बे में 35 कोल्हू थे। लेकिन, इस बार बाढ़ और बारिश से गन्ने की फसल काफी मात्रा में खराब हुई है। कोल्हू चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना मिलना मुश्किल है। गन्ना खराब होने से गुड़ का परता भी कम आएगा। इस कारण इस बार कोल्हू चलाना टेढ़ी खीर है । -रूप सिंह, कोल्हू संचालक।
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