ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में कोयले का स्टाक लगभग समाप्त हो गया है। हाल ये है कि प्रतिदिन आने वाली रैक के सहारे परियोजना की पांच यूनिटों को जैसे-तैसे चलाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
यूनिटों को पूरी क्षमता से न चलाने की असली वजह कोयले की कमी है, लेकिन परियोजना के जिम्मेदार बिजली की डिमांड के हिसाब से उत्पादन करने का दावा कर रहे हैं।
कोयले को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। कोयले की आपूर्ति न होने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। इसके बावजूद ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना के अधिकारी बिजली उत्पादन के सभी संसाधन पर्याप्त मात्रा में मौजूद होने की बात कह रहे हैं।
हालात यह हैं कि परियोजना में कोयले का स्टाक लगभग समाप्त हो गया है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ही घंटे का कोयला अब परियोजना के पास बचा हुआ है। प्रतिदिन आने वाली कोयले की रैकों के सहारे परियोजना की पांच यूनिटें चलाई जा रही हैं। इन यूनिटों को आधे भार पर ही चलाया जा रहा है।
परियोजना के जिम्मेदार कम उत्पादन के लिए बिजली की मांग न होने की बात कह रहे हैं। परियोजना के डीजीएम कमलेश सोनी ने बताया कि कोयले की आपूर्ति में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। कोयले की रैक आ रही हैं। बिजली की डिमांड के हिसाब से यूनिटों से उत्पादन किया जा रहा है।
फोटो खोल रही अफसरों की पोल
परियोजना प्रबंधन कोयले की कमी को लेकर लगातार पर्दा डालने की कोशिश में है। बताते हैं कि सीएचपी एरिया में कार्यरत कर्मचारियों को मोबाइल ले जाने से मना कर दिया गया है। जिससे कोयले की वास्तविक स्थिति की जानकारी बाहर न जा सके, लेकिन गुरुवार को अमर उजाला ने परियोजना के भंडारण व कन्वेयर बेल्ट के यूनिटों को जाने वाली जगह की हालत देखी। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि परियोजना में कोयला समाप्त हो गया है, लेकिन परियोजना के अधिकारी सच को छुपाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।