रायबरेली। बायो माइनिंग (कूड़े के पहाड़ का वैज्ञानिक निस्तारण) के जरिए न सिर्फ अपना शहर, बल्कि सई नदी साफ सुथरी होगी। नई पहल को जल्द शुरू करने के लिए खाका तैयार किया जा रहा है। नगर पालिका के अधिकारी कार्यदायी संस्थाओं से संपर्क कर रहे हैं, जोकि महानगरों में बायोमाइनिंग का काम कर रही हैं। इससे शहर की ढाई लाख आबादी को फायदा मिलेगा। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे नजर नहीं आएंगे। इन कूड़ों से जैविद खाद बनाई जाएगी। पालिका क्षेत्र के जैतूपुर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के निस्तारण का काम लगभग बंद चल रहा है। शहर के मोहल्लों में कूड़े के ढेर लगे हैं। मोहल्लों में गंदगी फैली रहती है। इसे देखते हुुए अब नगर पालिका के अधिकारी बायोमाइनिंग के जरिए इस समस्या का हल निकालने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस तरह होगा काम
बायोमाइनिंग के तहत जो कूड़ा एकत्र रहेगा, उसे जैतपुर कूड़ा निस्तारण प्लांट और पटेल नगर में ले जाया जाएगा। कचरे को अलग किया जाएगा। जैसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, लोहा, कांच आदि को अलग-अलग किया जाएगा। इसके बाद जो कचरा बचेगा, उसे कचरे के जरिए जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे कचरे का निस्तारण भी होगा सकेगा। जैविक खाद में आने वाली लागत को इस कार्य में लगाया जाएगा।
आरसीयूएस की टीम कर चुकी है सर्वे
बायो माइनिंग के जरिए कूड़ा निस्तारण के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय पर्यावरण अध्ययन केंद्र (आरसीयूसएस) की टीम यहां पहुंचकर सर्वे का काम कर चुकी है। टीम के सदस्यों ने यहां पहुंचकर पूरे शहर का भ्रमण करने के साथ ही कूड़ा निस्तारण प्लांट में कितना कूड़ा डंप है, इस बारे में जाना। इसके लिए पूरा स्टीमेट तैयार किया। जल्द आरसीयूएस की टीम नगर पालिका के अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेगी कि बायो माइनिंग के तहत कार्य करने पर कितना खर्च आएगा।
डंप है एक लाख मीट्रिक टन कूड़ा
मौजूदा समय की बात करें तो शहर के जैतूपुर कूड़ा निस्तारण प्लांट, पटेल नगर समेत अन्य शहर के मोहल्लों में करीब एक लाख मीट्रिक टन कूड़ा डंप है। कूड़ा निस्तारण प्लांट बंद होने की वजह से कूड़ा निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से अब बायोमाइनिंग के तहत कूड़ा निस्तारण के लिए खाका तैयार किया जा रहा है।
शुद्ध किया जाएगा सई नदी का पानी
शहर से होकर सई नदी गुजरी है, लेकिन मौजूदा समय में सीवर आदि के पानी से नदी का पानी खराब हो गया है। सई नदी के पानी को भी शुद्ध किया जाएगा। बायोरैमिडेशन के जरिए पानी की स्क्रीनिंग की जाएगी। जाली लगाई जाएगी। शुद्ध पानी नदी में जाएगा। शहर में सुरजुपुर, कानपुर रोड, मटिहा, कप्तान का पुरवा, ग्रिबशाह का पुरवा, इंड्रस्टिल एरिया, भवानीपुर पेपर मिल का नाला, रेवतीराम के तालाब से होकर जाने वाले नाले का पानी स्क्रीनिंग किया जाएगा।
कानपुर जैसे महानगरों में बायोमाइनिंग के जरिए कूड़ा निस्तारण का काम कराया जा रहा है। अब रायबरेली शहर में भी बायोमाइनिंग के तहत काम कराया जाएगा। इसके लिए पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आरसीयूएस की टीम यहां आकर सर्वे भी कर चुकी है। इसके लिए बकायदा टेंडर निकाला जाएगा। सई नदी के पानी की भी स्क्रीनिंग कराई जाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही इस योजना को लागू किया जाएगा। शहर के साथ सई नदी साफ सुथरी होगी। डॉ. आशीष कुमार सिंह, ईओ