रायबरेली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के दो ब्लॉक मैनेजरों के खिलाफ सरकारी धन को डकारने और समूहों से वसूली किए जाने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर शासन ने राज्य स्तरीय मनरेगा प्रकोष्ठ से जांच कराई।
दोषी पाए जाने पर दोनों ब्लॉक मिशन प्रबंधकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। प्रबंधकों ने पहले से बंद राजीव गांधी स्वयं सहायता समूहों में सीआईएफ का 1.10 लाख रुपये ट्रांसफर करके डकार लिया था। साथ ही समूहों से 20-20 हजार रुपये की वसूली भी की थी।
29 जुलाई को कलेक्ट्रेट स्थित बचत भवन के सामने कुसुमलता शुक्ला, रूबी, अफसरी बेगम, शबाना, शांती देवी, धन्नो, धनपत, दुर्गावती व संगीता ने धरना देकर आरोप लगाया था कि ब्लॉक मिशन प्रबंधक सुरेश कुमार व ज्ञानेंद्र सिंह काम दिए जाने के एवज में 20-20 हजार रुपये की वसूली कर रहे हैं। समूहों का लाभ भी अपने चहेतों को दे रहे हैं। अमर उजाला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 30 जुलाई के अंक में ‘वसूली के खिलाफ सड़क पर उतरीं महिलाएं’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर की सत्यता की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने 12 अगस्त को राज्य स्तरीय मनरेगा प्रकोष्ठ की टीम भेजकर मामले की जांच कराई थी। जांच में पाया गया कि बीएमएम सुरेश कुमार व ज्ञानेंद्र सिंह ने राजीव गांधी महिला विकास समिति के बंद समूहों के खातों में सीआईएफ का 1.10 लाख रुपये ट्रांसफर करके डकार लिया था।
जांच में समूहों से 20-20 हजार रुपये की वसूली की भी पुष्टि हो गई। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले ड्राई राशन के एवज में भी दो-दो हजार वसूलने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोनों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है।
उपायुक्त (एनआरएलएम) आदित्य कुमार ने शहर कोतवाली में सलोन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक सुरेश कुमार व ज्ञानेंद्र सिंह के खिलाफ सरकारी धन डकारने और समूहों से जबरन वसूली और धोखाधड़ी किए जाने का मुकदमा दर्ज करवा दिया है।
उपायुक्त (एनआरएलएम) आदित्य कुमार ने बताया कि राज्य स्तरीय मनरेगा प्रकोष्ठ की टीम की जांच में दोषी पाए जाने के बाद दोनों ब्लॉक मिशन प्रबंधकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही शहर कोतवाली में दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा भी दर्ज करवा दिया गया है।