रायबरेली। रायबरेली विकास प्राधिकरण के अफसरों की अनदेखी और अभियंताओं के मिलीभगत से शहर में बड़े पैमाने पर अवैध कालोनियां विकसित की जा रही है। एक भी प्लाटिंग का ले-आउट प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत नहीं है।
50 से अधिक बड़े प्रापर्टी डीलर इस खेल में जुटे हैं। अवैध प्लाटिंग के साथ ही अवैध भवनों का निर्माण भी धड़ल्ले से जारी है, लेकिन प्राधिकरण चुप है। ऐसे में रसूखदार और अपराधी किस्म के प्रापर्टी डीलर शहर की सूरत बिगाड़ने में लगे हुए हैं।
नियम के मुताबिक प्लाटिंग के लिए प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत कराना होता है। कहीं भी प्लाटिंग करने में सड़क, पार्क आदि की जमीन छोड़ने के बाद ही शेष जमीन पर भूखंड तैयार करके बिक्री की जा सकती है। प्राधिकरण से जब तक ले-आउट स्वीकृत नहीं होता तब तक भूखंडों पर निर्माण कराना अवैध है, लेकिन शहर में प्रापर्टी डीलर ऐसा नहीं कर रहे हैं।
बिना ले-आउट पास कराए अवैध कारोबार कर रहे प्रापर्टी डीलरों को आरडीए के अफसरों का ही संरक्षण मिला हुआ है। इसी कारण किसी के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं की गई है। प्लाटों को बेचने और अवैध निर्माण का काम धड़ल्ले से चल रहा है।
शहर के शक्ति नगर, राजघाट, कप्तान का पुरवा, कल्लू का पुरवा, पीएसी के सामने, महानंदपुर, मुंशीगंज, बहराना, दरियापुर, तुलसीनगर, जहानाबाद आदि क्षेत्रों में खुले आम अवैध कालोनियां बसाई जा रही हैं। खेतिहर जमीनों को भूखंडों में बांटकर महंगी कीमतों में बेचा जा रहा है, लेकिन तहसील और आरडीए के अधिकारी लापरवाह रवैया अपनाए हुए हैं।
असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे, किसानों को कर रहे आगे
अवैध रूप से प्लाटिंग करके करोड़ों रुपयों का वारा-न्यारा करने वाले प्रापर्टी डीलर परदे के पीछे से काम कर रहे हैं। किसानों की जमीनों का एग्रीमेंट कराने के बाद प्लाटिंग का खेल करते हैं और एक-एक प्लाट किसानों से सीधे ग्राहकों को बेच रहे हैं। हालांकि ग्राहकों से रुपये प्रापर्टी डीलर ही ले रहे हैं। पूरे खेल को अंजाम देने वाले प्रापर्टी डीलर कहीं भी कागज पर सामने नहीं आते हैं। हर जगह किसान ही पकड़ में आते हैं।
बिना ले-आउट पास कराए भूखंडों को बेचा नहीं जा सकता है। मानक पूरे होने की स्थिति में ही ले-आउट पास किया जाता है। अब तक आरडीए में एक भी ले-आउट पास नहीं कराया गया है। अवर अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में हो रही प्लाटिंग की जांच करके कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
बीपी मौर्या, सचिव आरडीए