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सरकारी अस्पतालों में 50 फीसदी प्रसव घटे, निजी हॉस्पिटलों की बल्ले-बल्ले

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रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। प्रसवों की संख्या भी लक्ष्य के सापेक्ष 50 प्रतिशत घट गई है। पिछले दो माह में 8235 प्रसव के सापेक्ष महज 4151 प्रसव कराए गए।
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अप्रैल में 2402 और मई में मात्र 1749 प्रसव हुए। जबकि पिछले मार्च में 5384 प्रसव हुए थे। खास बात यह कि सरकारी अस्पतालों में प्रसवों की संख्या कम हुई है, लेकिन निजी अस्पतालों में संख्या बढ़ गई है।
आशा बहुओं को सीएचसी, पीएचसी व उपकेंद्रों पर प्रसूताओं को पहुंचकर प्रसव कराने के आदेश दिए हैं। इसके एवज में आशाओं को भुगतान भी दिया जाता है।
लंबे समय से भुगतान प्रक्रिया बजट के अभाव में प्रभावित होने से आशा बहुएं ठीक से काम नहीं कर रही हैं। इस कारण विभाग सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव नहीं करवा पा रहा है।
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पिछले अप्रैल और मई माह में 8235 प्रसव के सापेक्ष मात्र 4151 प्रसव ही कराए जा सके। यही नहीं निजी अस्पतालों में इससे अधिक प्रसव दो माह में कराए गए।
मई में तो अप्रैल से काफी कम प्रसव कराए गए। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आशा बहुएं प्रसूताओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित नहीं कर रही हैं। जिससे निजी अस्पतालों की चांदी है।
जिले के अस्पतालों में दो माह में हुए प्रसव
अस्पताल दो माह में प्रसव
अमावां 69
बछरावां 311
बेलाभेला 38
डलमऊ 299
गौरा 55
डीह 185
हरचंदपुर 157
जगतपुर 167
जतुआ-टप्पा 214
खीरों 225
लालगंज 267
महराजगंज 175
नसीराबाद 170
सलोन 205
सरेनी 157
शिवगढ़ 173
ऊंचाहार 238
रोहनियां 115
महिशा अस्पताल 931
कुल 4151
सीएचसी, पीएचसी व उपकेंद्र पर लक्ष्य के सापेक्ष प्रसव नहीं हो पाए गए हैं। मामले में सभी अधीक्षकों को प्रसवों की संख्या बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। आशा बहुओं को भी प्रसूता को अस्पताल तक पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं।
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- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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