फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंखों की नसें सूखीं, रोशनी लौटने की उम्मीद कम

Tue, 28 Jun 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
विज्ञापन
रायबरेली में मंगलवार को जिला अस्पताल में बच्ची की आंखों की जांच करने के दौरान मौजूद परिवार के लोग जिनकी आंख की नसें सूखने से गई रोशनी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
देखने में आंखें ठीक-ठाक हैं, लेकिन देख नहीं सकते। किसी को बिल्कुल नहीं दिखता तो किसी को धुंधला दिख रहा है। ऐसा इसलिए है कि आंख की नस सूख रहीं हैं। आनुवंशिक समस्या होने के कारण आंखों की रोशनी वापस लौटने की उम्मीद भी कम हैं।
विज्ञापन


जिला अस्पताल में मंगलवार को रोशनी गंवाने वाले ऊंचाहार क्षेत्र के चारों पीड़ितों की आंखों की जांच की गई तो यही सच्चाई सामने आ गई। हालांकि बेहतर जांच के लिए रोगियों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

ऊंचाहार क्षेत्र के पूरे गुरुदयाल मजरे पुरवारा निवासी इमाम अली की पत्नी रबीना (38), बेटे सलमान (15) और बेटियां रुकसाना (13) व अफसाना (11) की आंखों की रोशनी सोमवार को जाने की खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था।
विज्ञापन


चारों पीड़ितों को मंगलवार सुबह जिला अस्पताल लाया गया। सभी की आंखों की जांच की गई तो सच्चाई सामने आ गई। जांच में रबीना की आंख तो नार्मल मिली, लेकिन उसे कम दिखने की समस्या है। सलमान की आंखों की नस लगभग सूख चुकी हैं, जिससे वह आंख की रोशनी गवां चुका है।

यही हाल रुकसाना व अफसाना की आंखों का भी मिला है। दोनों की आंखें लगातार कमजोर होती जा रही हैं। उनकी आंखों की नस सूख रहीं हैं। खास बात यह कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, वैसे-वैसे आंख की रोशनी जा रही है। 11 साल की अफसाना को काफी धुंधला दिखता है।

13 साल की रुकसाना के आंखों की रोशनी करीब 80 प्रतिशत चली गई है। जबकि 15 वर्षीय सलमान के आंखों की 95 प्रतिशत से अधिक रोशनी जा चुकी है। चिकित्सकों का मानना है कि आनुवंशिक समस्या होने के कारण इनकी आंखों की रोशनी का बचा पाना भी अब मुश्किल लग रहा है, लेकिन इसके इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है।

हालांकि पीड़ितों को जांच व बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। इमामअली की दो साल की बेटी रुखसार की रोशनी भी जा सकती है। उसे सभी बच्चों की आंखों की रोशनी 10 साल पूरी करने के बाद ही जाने लगी है।

चिकित्सकों का मानना है कि आनुवंशिक समस्या होने के कारण 10 साल से कम उम्र तक तो कोई दिक्कत नहीं होती है, लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती है आंखों की रोशनी जाने लगती है। रुकसार को भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इमामअली की आंखे नार्मल है। उसे देखने में कोई समस्या नहीं है।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे इमामअली के सामने छह बच्चों की परवरिश का जिम्मा है। ऊपर से बच्चों की आंख की रोशनी जाने से वह बेहद परेशान हो गया है। उसने बताया कि अफसाना कक्षा छह में पढ़ती है। रुकसाना कक्षा सात में  है।

सलमान कक्षा आठ में पढ़ता है। आंखों की रोशनी जाने के बाद वे स्कूल नहीं जा रहे हैं। पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। जेब में इतना रुपया भी नहीं है कि बच्चों की आंखों का इलाज करा सके। जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि सलमान, रुकसाना व अफसाना की आंखों की रोशनी जा रही हैं।

आंखों की नस सूख रहीं हैं। इसी कारण आंखें देखने में तो ठीक दिखती हैं, लेकिन रोगियों की आंखों में रोशनी नहीं रहती है। जिनैटिक समस्या होने के कारण इसके इलाज की गुंजाइश बेहद कम है। उम्र बढ़ने के साथ ही आंखों की रोशनी घटना तय है। इसे यदि आगे रोकना है कि ब्लड रिलेशन में शादी से बचा जाए।

वहीं सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि आंख की रोशनी गंवाने वाले पीड़ितों को मेडिकल कॉलेज में जांच व उपचार के लिए रेफर कर दिया गया है। वे घर चले गए हैं। बुधवार को सभी लखनऊ ले जाएं जाएंगे।

आंख की रोशनी जाने का मुख्य कारण मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद भी स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन प्रथम दृष्टया जिनैटिक समस्या ही सामने आई है। इसका पहले तो कोई इलाज नहीं था, लेकिन हो सकता है कि अब कुछ इलाज की गुंजाइश हुई हो।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें